Skip to content
शून्यता का स्वर
Duration4:17

शून्यता का स्वर

पंडित शून्यधुन व्यास

शास्त्रीय हिंदुस्तानी

About

यह रचना तानपुरा के स्थिर ड्रोन और तबले के जटिल ताल चक्र पर आधारित है। इसमें राग की सूक्ष्म मींड और आलाप-जोड़-झाला की पारंपरिक प्रगति के माध्यम से एक आध्यात्मिक और ध्यानमग्न अनुभव पिरोया गया है।

Lyrics

alap

साँसें थमी हैं शून्यता के द्वार पररूह ढूँढे किनारा इस अथाह विस्तार परन कोई दिशा, न कोई निशान बाकीबस एक धुन है, जो बहती है मन के मँझधार पर

jor

समय की लकीरें धुंधली हो चली हैंपलकों के साये में यादें पली हैंएक अनकही प्यास, एक अनकहा सा स्वरबूँद-बूँद करके रूह मेरी ढली हैजहाँ खामोशी भी अब गा रही हैअस्तित्व की हर परत खुल रही है

gat

बिन बोले ही सब कह जाना हैइस सुर में ही अब बह जाना हैन पाने की हसरत, न खोने का डरबस उसी के नूर में रह जाना हैतारों की थरथराहट में खोई है दुनियाखुद को खुद से ही मिलाना है

jhala

अग्नि सी दहकती, लहर सी बहतीये चेतना अब क्या क्या कहतीमिट जाए फासला, मिट जाए ये दूरीमिट जाए हर रंज, मिट जाए ये मजबूरीएक लय में सिमट जाए सारा जहाँबस एक यही धुन, यही मेरी पूरीयही मेरी पूरीयही मेरी पूरी

शून्यता का स्वर

पंडित शून्यधुन व्यास

Preview

शून्यता का स्वर by पंडित शून्यधुन व्यास | EchoLoRA: Generate a Song with AI