शून्यता का स्वर
पंडित शून्यधुन व्यास
शास्त्रीय हिंदुस्तानी
About
यह रचना तानपुरा के स्थिर ड्रोन और तबले के जटिल ताल चक्र पर आधारित है। इसमें राग की सूक्ष्म मींड और आलाप-जोड़-झाला की पारंपरिक प्रगति के माध्यम से एक आध्यात्मिक और ध्यानमग्न अनुभव पिरोया गया है।
Lyrics
साँसें थमी हैं शून्यता के द्वार पररूह ढूँढे किनारा इस अथाह विस्तार परन कोई दिशा, न कोई निशान बाकीबस एक धुन है, जो बहती है मन के मँझधार पर
समय की लकीरें धुंधली हो चली हैंपलकों के साये में यादें पली हैंएक अनकही प्यास, एक अनकहा सा स्वरबूँद-बूँद करके रूह मेरी ढली हैजहाँ खामोशी भी अब गा रही हैअस्तित्व की हर परत खुल रही है
बिन बोले ही सब कह जाना हैइस सुर में ही अब बह जाना हैन पाने की हसरत, न खोने का डरबस उसी के नूर में रह जाना हैतारों की थरथराहट में खोई है दुनियाखुद को खुद से ही मिलाना है
अग्नि सी दहकती, लहर सी बहतीये चेतना अब क्या क्या कहतीमिट जाए फासला, मिट जाए ये दूरीमिट जाए हर रंज, मिट जाए ये मजबूरीएक लय में सिमट जाए सारा जहाँबस एक यही धुन, यही मेरी पूरीयही मेरी पूरीयही मेरी पूरी
शून्यता का स्वर
पंडित शून्यधुन व्यास
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