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अनहद की गूँज
Duration4:04

अनहद की गूँज

उस्ताद चंद्रकांत वैद्य

शास्त्रीय हिंदुस्तानी संगीत

About

यह रचना तानपुरा के निरंतर ड्रोन और तबले के जटिल ताल चक्र के साथ एक शास्त्रीय हिंदुस्तानी राग पर आधारित है। सूक्ष्म स्वर अलंकरण और सितार की मेलोडिक जुगलबंदी इसे एक गहरा आध्यात्मिक और चिंतनशील अनुभव बनाती है।

Lyrics

alap

साँसों के तार में, ये कैसा खिंचाव हैबिन कहे जो समझ लूँ, वही तो प्रभाव हैशून्य में खोया मन, जैसे जल में कमलठहरा हुआ सा हर पल, जैसे बीता हुआ कल

jor

धड़कन की लय में, एक गहरा नशा हैअंधियारी राहों में, बस तू ही दिशा हैपलकों के साये में, ख्वाबों का बसेरामिटता नहीं है कभी, ये रूह का घेरा

gat

नैनों की खिड़की से, झाँके कोई यादेंजुड़ने लगी हैं अब, टूटी हुई बातेंचाँदनी की ओढ़नी, ओढ़े खामोशियाँगुनगुनाने लगी हैं, दिल की ये दूरियाँ

jhala

तार-तार बिखरा मैं, फिर भी सँवरता हूँतेरी ही यादों में, हर पल निखरता हूँअनहद की गूँज में, खोया ये संसार हैतू ही है मंज़िल, तू ही मेरा प्यार हैमिट जाए फासले, बस यही इंतज़ार हैतू ही है मंज़िल, तू ही मेरा प्यार है

अनहद की गूँज

उस्ताद चंद्रकांत वैद्य

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अनहद की गूँज by उस्ताद चंद्रकांत वैद्य | EchoLoRA: Generate a Song with AI