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Duration4:05

साँझ की मौन रागिनी

पंडित हरिप्रसाद वर्मा

शास्त्रीय हिंदुस्तानी संगीत

About

यह रचना तानपुरा की गूंजती ड्रोन ध्वनि के साथ शुरू होती है, जिसमें सितार की सूक्ष्म मींड और तबले का जटिल ताल चक्र इसे एक गहरा शास्त्रीय रूप देते हैं। राग आधारित मेलोडिक संरचना और भावपूर्ण गायकी मिलकर एक शांत और आत्मनिरीक्षण पूर्ण वातावरण का निर्माण करती है।

Lyrics

alap

साँझ ढले, मनवा मेरा भटकेअंखियों में काजल, यादें हैं अटकेशून्य में खोजूँ, तेरा ही सायाकिस मोड़ पर, दिल ये खो आया

jor

धड़कन की लय में, नाम तेरा गूँजेबूँद-बूँद बरसे, प्यासा मन पूजेबीत रही घड़ियाँ, मौन का पहरातेरी ही यादों का, गहरा है गहरा

gat

तुम बिन सूनी, मेरी ये डगरियाकाँटों पे बीते, अपनी उमरियाआओ तो साजन, रैन सँवर जाएतेरे ही आने से, सब कुछ निखर जाए

jhala

तारों की छाँव में, ढूँढूँ ठिकानाअधूरी कहानी, तेरा ही तरानासाँसें पुकारे, अब आ भी जाओइस रूह को अपनी, बाहों में लाओ

gat

तुम बिन सूनी, मेरी ये डगरियाकाँटों पे बीते, अपनी उमरियाआओ तो साजन, रैन सँवर जाएतेरे ही आने से, सब कुछ निखर जाए

alap

खोया है सब कुछ, पाया है तुमकोसमर्पित किया, ये जीवन तुमकोमौन का अंत हो, मिलन का हो रागमिट जाए मन का, ये सारा विराग

साँझ की मौन रागिनी

पंडित हरिप्रसाद वर्मा

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साँझ की मौन रागिनी by पंडित हरिप्रसाद वर्मा | EchoLoRA: Generate a Song with AI