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सावन की अनकही धुन
Duration4:35

सावन की अनकही धुन

विहान रागानुराग

Classical Hindustani

About

यह रचना तानपुरा के स्थिर ड्रोन और सितार की सूक्ष्म अलंकरणों के साथ रची गई है, जो श्रोता को एक गहन ध्यानपूर्ण अवस्था में ले जाती है। इसमें तबले के जटिल ताल चक्रों का प्रयोग किया गया है जो धीरे-धीरे आलाप से झला की ओर बढ़ते हुए एक दिव्य अनुभव प्रदान करते हैं।

Lyrics

alap

शून्य में गूँजती एक मौन पुकारसाँसों की डोर में उलझा संसारनैनों के दर्पण में ढलती है शामरूह को ढूँढे है अपना ही नाम

jor

धड़कन की लय पर समय का पहियाबीते दिनों का वो धुंधला सा सैयांपलकों पे ठहरी हुई एक बूँद प्यासखोया है मन मेरा, तू है कहाँ आस-पास

gat

सावन की बूँदें जब तन को भिगोती हैंयादें पुरानी सब आँखें पिरोती हैंतारों की चादर में लिपटी ये रातेंखामोश लबों की अनकही बातेंसावन की बूँदें जब तन को भिगोती हैंयादें पुरानी सब आँखें पिरोती हैंतारों की चादर में लिपटी ये रातेंखामोश लबों की अनकही बातें

jhala

डूबा है मन, डूबी है कायातेरी ही धुन में ये जग भरमायापल-पल बढ़ती ये तड़प की आगतू ही है मंज़िल, तू ही है रागतू ही है मंज़िल, तू ही है रागखोया है मन मेरा, तू है कहाँ आस-पाससाँसों की डोर में उलझा संसार

सावन की अनकही धुन

विहान रागानुराग

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सावन की अनकही धुन by विहान रागानुराग | EchoLoRA: Generate a Song with AI