शून्य की गोद
पंडित शून्यनाथ व्यास
शास्त्रीय हिंदुस्तानी
About
यह रचना तानपूरे के निरंतर गुंजन और तबले के जटिल ताल चक्र पर आधारित है। इसमें राग की सूक्ष्म स्वर-लहरियों और आलाप-जोड़-झाला की पारंपरिक प्रगति के माध्यम से एक आध्यात्मिक और ध्यानमग्न वातावरण का निर्माण किया गया है।
Lyrics
साँसों की डोरी में पिरोया है नाम तेराशून्य की गोद में बैठा है मन मेरान कोई दिशा है, न कोई किनाराबस एक मौन का गहरा सहाराहवाएं थम गई हैं, वक्त ठहर गया हैअस्तित्व का हर कोना तुझमें ही ढल गया है
धड़कन की लय में बढ़ती बेचैनीपलकों की ओट में छिपी है अनकहीये कैसी प्यास है, जो बुझती नहींये कैसी राह है, जो दिखती नहींमृगतृष्णा सा है ये सारा संसारतू ही सत्य है, तू ही आधार
निर्मल जल सा बहती है ये विरह की धारातू मिल जाए तो मिट जाए ये जग का अँधियारानैनों की बंद खिड़की से झांकती है यादेंतुझसे जुड़ी हैं मेरी हर एक इबादत की बातेंखोई हुई सी रूह, जैसे भटका कोई पंछीढूंढ रही है फिर से वो पुरानी मखमली हंसी
पल-पल बीतता है तेरी प्रतीक्षा मेंडूबा हुआ हूँ मैं तेरी ही भिक्षा मेंसमय का चक्र घूमे, पर मैं वहीं खड़ा हूँतेरी ही यादों के साये में मैं तो अड़ा हूँमिट्टी का ये तन, मिट्टी में ही मिल जाएगापर तेरा ये प्रेम, अमर होकर खिल जाएगा
अग्नि में तपकर जो कुंदन बन जाएवही तो प्रेम की असली परिभाषा कहलाएतेज है, नूर है, एक गहरा सा सुरूर हैतुझसे दूर होकर भी, तू ही मेरे पास भरपूर हैमौन की ये भाषा, तू ही समझता हैमेरा हर एक कतरा तुझमें ही बसता है
अनंत की ओर ले जा मुझे ऐ मेरे मीतलिख दे मेरी रूह पर अपने प्रेम की प्रीतन कोई बंधन, न कोई अब शिकायत बची हैतेरी चौखट पर ही मेरी आखिरी जन्नत सजी हैसमाप्त हुआ सफर, अब तो बस तेरा नाम हैतू ही इब्तिदा है, तू ही मेरा अंतिम मुकाम है
शून्य की गोद
पंडित शून्यनाथ व्यास
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