साँसों की डोरी
विहान नटराज
Classical Hindustani
About
यह रचना तानपुरा के निरंतर गूंजते ड्रोन और सितार की सूक्ष्म सूक्ष्मस्वर प्रधान राग संरचना पर आधारित है। तबले के जटिल ताल चक्र के साथ, यह संगीत आत्म-साक्षात्कार की एक गहन और आध्यात्मिक यात्रा प्रस्तुत करता है।
Lyrics
साँसों की डोरी में पिरोई है एक मौन पुकारशून्य के विस्तार में ढूंढता हूँ तेरा आधारनैनों के दर्पण में उतरी है धुंधली सी एक यादजैसे बरसते बादलों में खो गई है फरियाद
समय के चक्र में उलझी हुई मेरी ये रूह हैहर धड़कन में छिपी एक अनकही सी आह हैदूरी की इन लकीरों को मिटा दूँ मैं कैसेतेरी यादों के भंवर में डूबता हूँ ऐसेजैसे कोई प्यासा मृग ढूंढता हो जल की धारमन के आंगन में गूंजे बस तेरा ही विस्तार
मन की वीणा पर छड़ी है आज एक नई तानतू ही मेरा ध्येय तू ही मेरा सारा जहानठहर गई है घड़ी ये पल भी अब थम से गएतेरे नूर के साये में हम तो खुद में ही खो गएआँखें मूंदूँ तो दिखता है बस तेरा ही रूपजैसे अंधेरी रातों में खिली हो कोई धूप
सूरज ढले तो यादों का कारवां निकल पड़ता हैचांदनी की चादर ओढ़े मन भी मचल पड़ता हैकिस मोड़ पे ले आई है ये नियति की चालबेचैन है ये मन और हाल-ए-दिल है बेहालपर विश्वास की डोर अब भी थामे बैठा हूँतेरी राहों के किनारे मैं तो बैठा हूँ
बढ़ती है प्यास और गहराता है ये मौनतू ही मेरा अपना और तू ही है कौनमिटते हैं सारे फासले पिघलती है ये दूरीअधूरी सी इस दास्तां को कर दे तू पूरीसाँसों की माला पे तेरा नाम ही जपता हूँतेरी ही रज़ा में अब मैं खुद को ढालता हूँ
अनंत की ओर ले चल मुझे तू इस बारसागर की लहरों सा बहे ये प्यारन कोई सीमा न कोई बंधन का शोरबस तू ही तू दिखे अब चारों ओरसमाप्त हुआ ये सफर और शुरू हुआ एक नया भोरतेरे ही चरणों में अब तो है मेरा ठौर
साँसों की डोरी
विहान नटराज
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