शून्य का छोर
आकाशवाणी ध्वनि
इंडियन इलेक्ट्रॉनिक
About
यह ट्रैक पारंपरिक राग-आधारित सितार की धुन और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक बीट्स का एक जटिल संगम है। इसमें तबला की पॉलीरिदम और सिंथेसाइज़र के गहरे वायुमंडलीय साउंडस्केप का उपयोग किया गया है, जो रूहानी सुकून और आधुनिक तकनीक को जोड़ता है।
Lyrics
खोई हुई सी राहें, ये धुंधली सी शामेंसाँसों की डोरी में लिपटी हैं यादेंशून्य के इस छोर पर, खुद को खोजूँ मैंअनकही बातों में, आज फिर उलझूँ मैं
आ... आ...ये नदियाँ, ये धारा, ये मन का किनाराभटकता सा पंछी, ढूँढे सिताराखामोश लबों पर, प्यास पुरानीमिट्टी की खुशबू, रूह की कहानी
भीड़ में खोया, पर खुद से मिला हूँराहों की धूल में, अब मैं खिला हूँशहर की ये चकाचौंध, आँखों में चुभेपुराने ख्यालों के धागे, यहाँ सब बुनेपत्थरों के जंगल में, दरिया सा बहताजो दिल ने न बोला, वो ज़माना है कहता
रफ़्तार की इस दौड़ में, मैं ठहर सा गयाबीते हुए कल का, मैं पहर सा गयाधड़कनें बढ़ीं, जैसे कोई आहट होअंदर की हलचल, बस तेरी चाहत होउठती लहरें, जैसे कोई पुकार होखुद से मिलन का, ये पहला ही वार हो
बिखरे हैं टुकड़े, अब जुड़ने लगे हैंअंबर के तारे, अब मुड़ने लगे हैंधुंध छंट रही, अब साफ़ सब दिखता हैमेरे ही भीतर, एक जहान बसता हैदूरी मिटाकर, पास मैं आ गयाखुद के ही साये में, मैं खो सा गया
पुरानी ये रीतें, नई ये उड़ानेंबदलते मौसम के, ये सब ठिकानेकल जो था सपना, आज वो है हकीकतबदलाव की इस घड़ी में, अपनी ही बरकतसब कुछ है यहाँ, फिर भी है खालीजैसे किसी बंजर में, खिली हो दिवाली
धीमी सी सांसें, थम गया है ये मंजरबाहर की शोर से, दूर हूँ मैं अंदरसुन रहा हूँ मैं खुद की ही पुकारमिट रही है अब, ये सारी दीवारआत्मा का नाता, इस माटी से गहराकट गया अंधेरा, हुआ ये सवेरा
उड़ान अब ऊँची, पर पाँव ज़मीं परनिशान छोड़ आया, मैं अपनी ही कमी परसफर ये निराला, मंज़िल का न होशबस बहता रहूँ मैं, होकर मदहोशये लम्हा थमा, जैसे वक्त का इशारामैं ही हूँ किनारा, मैं ही हूँ सहारा
खोया हुआ सा, अब मिल गया हूँखुद के ही दरिया में, मैं खिल गया हूँशांत है सब, शांत है मनशून्य में लीन, ये अपना जीवनसाँसों की लय में, रूह का बसेरामिट गया अब तो, ये सारा अंधेराआ... आ... शून्य... बस शून्य...
शून्य का छोर
आकाशवाणी ध्वनि
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