श्याम सुंदर की जय हो
भक्ति तरंग
भजन
About
यह एक पारंपरिक भजन है जिसमें हारमोनियम की मधुर धुन और तबले के लयबद्ध चक्र का सुंदर मेल है। इसमें भक्तिपूर्ण कॉल-एंड-रस्पॉन्स गायन शैली का उपयोग किया गया है जो धीरे-धीरे एक गहन आध्यात्मिक तीव्रता की ओर बढ़ता है।
Lyrics
मन की गलियों में छाई है खामोशीअब तो बस तेरी ही बची है मदहोशीसांसों की डोरी तुझसे ही जुड़ी हैमेरी रूह तुझमें ही आके मुड़ी है
अंधियारे पथ पर तू ही दीया हैमैंने तो बस तुझको ही जिया हैदुनिया के मेले में खोया था जो मैंतुझमें ही खुद को मैंने पाया है
हे प्रभु, तू ही मेरी मंज़िल का तारासागर की लहरों में तू ही किनारातेरी चरण धूलि माथे पे लगा लूंतेरी ही भक्ति में खुद को मिटा लूं
श्याम सुंदर की जय हो
मन के मंदिर की जय हो
प्रेम के सागर की जय हो
मुक्ति के पथ की जय हो
तेरा नाम जपुं, दिन-रात जपुंतेरी याद में मैं, हर बात जपुंअग्नि सी बढ़ती, ये प्यास मेरीतू ही है स्वामी, ये आस मेरीतू ही है स्वामी, ये आस मेरी
राम नाम की जय हो
सत्य धाम की जय हो
प्रेम के सागर की जय हो
मुक्ति के पथ की जय हो
शांत हुआ मन, शांत हुई कायातुझमें ही प्रभु, सब कुछ है पायासब कुछ है पायासब कुछ है पाया
श्याम सुंदर की जय हो
भक्ति तरंग
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