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Duration3:32

सांझ की पगडंडी

धरती धानी

Indian Folk

About

यह गीत ग्रामीण भारत की सादगी और मिट्टी से जुड़े गहरे लगाव को दर्शाता है। इसमें तबला और ढोलक की जीवंत ताल के साथ सारंगी की मधुर मोडालिटी का उपयोग किया गया है, जो पारंपरिक लोक संगीत की आत्मा को जीवंत करता है।

Lyrics

intro

ओ रे मनवा, जाग ज़रामिट्टी की खुशबू को थाम ज़रापग-पग डोलती ये धरती धानीसुन ले तू आज ये अनकही कहानी

verse

खेतों की मेढ़ पे सूरज अटका हैपसीने की बूंदों में सावन लटका हैदादी की बातों में वो पुरानी यादेंहाथों की लकीरों में लिखी ये इबादतनदी के किनारे वो पीपल की छांवयादों का डेरा है, मेरा ये गांवहवाओं ने छेड़ी है कोई पुरानी तानमिट्टी से जुड़कर ही मिलता है मान

refrain

ओ मेरी माटी, ओ मेरे आँगनतुझमें ही बसता है मेरा ये जीवनझूम के गाए ये हवाओं की टोलीरंगों में घुली है ये खुशियों की होली

instrumental-break
verse

चाँदनी रात में चूड़ियों की खनकआंखों में बसी है वो मीठी सी चमकदूर कहीं बजती वो घुंघरू की तालबदले समय पर, न बदले ये चालबड़ों का आशीर्वाद, दुआओं का सायारिश्तों का ताना-बाना हमने है पायाहंसते-हंसाते ये दिन बीत जाएंगेमिट्टी के कर्ज हम यहीं चुकाएंगे

refrain

ओ मेरी माटी, ओ मेरे आँगनतुझमें ही बसता है मेरा ये जीवनझूम के गाए ये हवाओं की टोलीरंगों में घुली है ये खुशियों की होली

outro

सांझ ढले जब पंछी घर आएंहम भी तो लौटकर घर को ही जाएंमिट्टी की खुशबू, रूह में समाएमिट्टी की खुशबू, रूह में समाए

सांझ की पगडंडी

धरती धानी

Preview

सांझ की पगडंडी by धरती धानी | EchoLoRA: Generate a Song with AI