चटनी की ताल
रंगीला सवेरा
चटनी
About
यह गीत पारंपरिक ढोलक की थाप और आधुनिक सोका-प्रेरित सिंथेसाइज़र का एक जीवंत मेल है। इसमें ढंटाल की धात्विक ध्वनि और उत्साहपूर्ण वोकल डिलीवरी का उपयोग किया गया है जो किसी भी महफिल में जान डाल देती है।
Lyrics
ढोलक की थाप पे दिल ये मचल जाएआज महफिल में रंगत है छाईसब मिलकर नाचो, सब गाओ आजखुशियों की देखो कैसी रुत है आई
आंगन में देखो सजी है बहारअपनों का साथ और प्यार का खुमारपैरों में घुंघरू, लबों पे हंसीआज रात गुज़रेगी मस्ती में हीधड़कन में देखो ये कैसी उमंगसब रंगे आज एक ही रंग
चटनी की ताल पे झूमे ये जहानमस्ती में डूबा है सारा ये समांकमर लचका के सब नाचो आजखुशियों का देखो ये प्यारा सा राजचटनी की ताल पे झूमे ये जहानमस्ती में डूबा है सारा ये समां
पुरानी यादें और नया ये जोशनाचते-नाचते खो जाए होशहवाओं में घुली है मीठी सी धुनसब थिरकते हैं आज बनके जुनूँन कोई पराया, न कोई यहाँ दूरसब गा रहे हैं ये मस्ती में चूर
चटनी की ताल पे झूमे ये जहानमस्ती में डूबा है सारा ये समांकमर लचका के सब नाचो आजखुशियों का देखो ये प्यारा सा राजचटनी की ताल पे झूमे ये जहानमस्ती में डूबा है सारा ये समां
घूम के आ, फिर से गाखुशियों का ये कारवांरात ढलने न देना, पल ठहरने न देनामस्ती की लहरों में बहते ही रहनासबके दिलों में बस प्यार है पलताआज का ये पल है सबसे अनोखा
चटनी की ताल पे झूमे ये जहानमस्ती में डूबा है सारा ये समांकमर लचका के सब नाचो आजखुशियों का देखो ये प्यारा सा राजचटनी की ताल पे झूमे ये जहानमस्ती में डूबा है सारा ये समां
झूमते रहो, गाते रहोखुशियाँ यूँ ही बांटते रहोये समां, ये रात, ये प्यारयाद रहेगा ये त्यौहारझूमते रहो, गाते रहोझूमते रहो, गाते रहो
चटनी की ताल
रंगीला सवेरा
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