तेरी माया अपरंपार
भजन ज्योति
भजन
About
यह भजन पारंपरिक हारमोनियम की मधुर धुन और तबले के लयबद्ध चक्रों के साथ एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। इसमें सामूहिक पुकार (call-and-response) की संरचना है जो धीरे-धीरे भक्ति की तीव्रता को बढ़ाती है, जिससे मन को शांति और एकाग्रता प्राप्त होती है।
Lyrics
मन की गलियों में उजियारा सा छा गयाभीतर का दीपक जैसे फिर से जगमगा गयासांसों की माला पे तेरा नाम पिरोया हैखोया था जो कल, आज तुझमें ही पाया है
राहों के कांटे अब फूल बन के खिलते हैंजब से हम तेरी चौखट पे आ के मिलते हैंन कोई शिकवा है, न कोई अब प्यास हैतू ही तो मेरी रूह का हर एक अहसास हैमंजिल का पता नहीं, पर डगर सुहानी हैतूने ही लिखी मेरी ये अधूरी कहानी है
ओ मेरे प्रभु, तेरी माया अपरंपार हैतेरी शरण में ही तो मेरा संसार हैतुझसे ही शुरू, तुझपे ही खत्म ये सफरतू ही किनारा, तू ही मेरी मंझधार है
दुनिया के शोर में भी तेरा नाम सुनता हूँतेरी ही धुन में मैं हर पल गुनगुनाता हूँकांच सा ये मन है, इसे तू ही संभाल लेअपने चरणों की छाया में मुझे भी पाल लेन मांगू सोना, न मांगू मैं कोई शानबस तेरी भक्ति का मिल जाए वरदान
नारायण, नारायण, नारायण
नारायण, नारायण, नारायण
केशव, माधव, गिरधारी
केशव, माधव, गिरधारी
राधे-कृष्ण, राधे-कृष्ण
राधे-कृष्ण, राधे-कृष्ण
अंधियारे पथ पर तू ही तो मशाल हैतू ही तो मेरी बिगड़ी हर एक चाल हैजब भी मैं गिरा, तूने हाथ आगे बढ़ायातूने ही मुझे प्रेम का ये अर्थ समझाया
तेरी ज्योति से रोशन ये सारा जहान हैतू ही तो मेरी आत्मा का अभिमान हैबढ़ती जाए ये लगन, मिटती जाए ये दूरीतेरे बिना मेरी हर इबादत अधूरीजय हो तेरी, जय हो तेरीमेरे मन के मीत, जय हो तेरी
श्री राम, जय राम, जय जय राम
श्री राम, जय राम, जय जय राम
हरि ओम, हरि ओम, हरि ओम
हरि ओम, हरि ओम, हरि ओम
शांत हुआ मन, शीतल हुई कायातेरी शरण में मैंने सब कुछ पायाअब बस तू ही, अब बस तू हीमेरे रोम-रोम में बस तू हीतू ही... तू ही... तू ही...
तेरी माया अपरंपार
भजन ज्योति
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