हे गोविंद, हे गोपाल
गोविंद कृपा स्वर
भजन
About
यह भजन एक पारंपरिक और आध्यात्मिक रचना है, जिसमें हारमोनियम की मधुर धुन और तबले का लयबद्ध चक्र शामिल है। इसमें एक गहरा भक्तिपूर्ण कॉल-एंड-रेस्पॉन्स पैटर्न है जो मन को शांति और ध्यान की ओर ले जाता है।
Lyrics
मन की लहरों में तेरा ही नाम हैसांसों की डोरी में तेरा ही धाम हैधूल हूँ मैं तेरे चरणों की प्रभुतेरी दया ही मेरा सुबह और शाम है
अंधियारे पथ पर तू ही तो ज्योति हैतेरी कृपा से ही हर कल की मोती हैभटके हुए राही को तूने ही संभाला हैतेरी शरण में ही जीवन की होति है
हे गोविंद, हे गोपाल, तेरी महिमा अपरम्पारसागर जैसी तेरी ममता, तू ही मेरा आधारहे गोविंद, हे गोपाल, तेरी महिमा अपरम्पारतेरी शरण में आने को, व्याकुल है ये संसार
माटी का ये तन है, तू ही तो प्राण हैतू ही तो सत्य है, तू ही तो ज्ञान हैमिट जाए अहंकार, बस तू ही तू बचेतू ही तो आदि है, तू ही तो अवसान है
राधे कृष्ण, राधे कृष्ण
राधे कृष्ण, राधे कृष्ण
मन मंदिर में वास करो
मन मंदिर में वास करो
दुख हरो, सुख भरो
दुख हरो, सुख भरो
छोड़ दिया मैंने जग का ये बंधन साराअब तो बस तेरा ही सहारा है प्यारातू जो हंसे तो खिल उठे ये बगियातू जो रहे तो जीवन है उजियारा
तेरे नाम की माला जपे ये मन हर पलतेरी भक्ति में ही कट जाए हर कलबहती जाए प्रेम की धारा अब तोतू ही किनारा, तू ही है हलचल
हरि बोल, हरि बोल
हरि बोल, हरि बोल
प्रेम से बोलो, मन से बोलो
प्रेम से बोलो, मन से बोलो
हरि बोल, हरि बोल
उम्मीद की लौ अब जलने लगी हैतेरी ही खुशबू चलने लगी हैसारे सवालों के उत्तर मिले हैंतेरी राहों पर चलने लगी है
मेरा मुझमें कुछ भी नहीं, जो है सो तेरातू ही तो है स्वामी, तू ही सवेराशांति का सागर, तू ही है बसेराबस तेरा ही नाम, बस तेरा ही घेराहरि नाम, हरि नाम, हरि नाम...बस तेरा ही नाम...
हे गोविंद, हे गोपाल
गोविंद कृपा स्वर
Preview