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Duration4:44

हे गोविंद, हे गोपाल

गोविंद कृपा स्वर

भजन

About

यह भजन एक पारंपरिक और आध्यात्मिक रचना है, जिसमें हारमोनियम की मधुर धुन और तबले का लयबद्ध चक्र शामिल है। इसमें एक गहरा भक्तिपूर्ण कॉल-एंड-रेस्पॉन्स पैटर्न है जो मन को शांति और ध्यान की ओर ले जाता है।

Lyrics

intro

मन की लहरों में तेरा ही नाम हैसांसों की डोरी में तेरा ही धाम हैधूल हूँ मैं तेरे चरणों की प्रभुतेरी दया ही मेरा सुबह और शाम है

verse 1

अंधियारे पथ पर तू ही तो ज्योति हैतेरी कृपा से ही हर कल की मोती हैभटके हुए राही को तूने ही संभाला हैतेरी शरण में ही जीवन की होति है

chorus

हे गोविंद, हे गोपाल, तेरी महिमा अपरम्पारसागर जैसी तेरी ममता, तू ही मेरा आधारहे गोविंद, हे गोपाल, तेरी महिमा अपरम्पारतेरी शरण में आने को, व्याकुल है ये संसार

verse 2

माटी का ये तन है, तू ही तो प्राण हैतू ही तो सत्य है, तू ही तो ज्ञान हैमिट जाए अहंकार, बस तू ही तू बचेतू ही तो आदि है, तू ही तो अवसान है

call-and-response
गाओ

राधे कृष्ण, राधे कृष्ण

प्रभु

राधे कृष्ण, राधे कृष्ण

गाओ

मन मंदिर में वास करो

प्रभु

मन मंदिर में वास करो

गाओ

दुख हरो, सुख भरो

प्रभु

दुख हरो, सुख भरो

bridge

छोड़ दिया मैंने जग का ये बंधन साराअब तो बस तेरा ही सहारा है प्यारातू जो हंसे तो खिल उठे ये बगियातू जो रहे तो जीवन है उजियारा

crescendo

तेरे नाम की माला जपे ये मन हर पलतेरी भक्ति में ही कट जाए हर कलबहती जाए प्रेम की धारा अब तोतू ही किनारा, तू ही है हलचल

call-and-response
गाओ

हरि बोल, हरि बोल

प्रभु

हरि बोल, हरि बोल

गाओ

प्रेम से बोलो, मन से बोलो

प्रभु

प्रेम से बोलो, मन से बोलो

गाओ

हरि बोल, हरि बोल

verse 3

उम्मीद की लौ अब जलने लगी हैतेरी ही खुशबू चलने लगी हैसारे सवालों के उत्तर मिले हैंतेरी राहों पर चलने लगी है

outro

मेरा मुझमें कुछ भी नहीं, जो है सो तेरातू ही तो है स्वामी, तू ही सवेराशांति का सागर, तू ही है बसेराबस तेरा ही नाम, बस तेरा ही घेराहरि नाम, हरि नाम, हरि नाम...बस तेरा ही नाम...

हे गोविंद, हे गोपाल

गोविंद कृपा स्वर

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