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तुम ही आधार प्रभु
Duration4:07

तुम ही आधार प्रभु

जगमोहन दास

Indian Devotional

About

यह गीत एक गहन भक्तिपूर्ण रचना है जिसमें हारमोनियम की मधुर धुन और तबले की पारंपरिक थाप का सुंदर संगम है। इसमें गायक की भावपूर्ण आवाज़ ईश्वर के प्रति समर्पण और आत्म-साक्षात्कार के भावों को गहराई से व्यक्त करती है।

Lyrics

intro

ओम् नमो भगवतेशून्य में खोजती मेरी आँखेंभीतर के उस मौन को पुकारतीमेरी सांसें, मेरी धड़कनें

verse 1

मिट्टी की इस काया मेंएक ज्योति जलती है बाहर की इन गलियों से दूर ये चलती है मैं तो बस एक प्यासा पंछीतेरी ओर उड़ता हूँअपने ही अस्तित्व कोतुझमें ही जोड़ता हूँ

chorus

मेरे प्रभु, तुम ही आधार होमेरे मन का तुम ही संसार होसांसों की माला में नाम तुम्हारातुम ही किनारा, तुम ही सहारातुम ही सहारा

verse 2

न कोई बंधन, न कोई मायातेरी ही छाया में मैंने खुद को पायाभीड़ में खोया था जो रास्ता वो अब मिल गया हैतेरी भक्ति का फूल मेरे हृदय में खिल गया है

call-and-response
गाओ

हरि का नाम

सुनो

अंतस का धाम

गाओ

हरि का नाम

पाओ

परम विश्राम

गाओ

हरि का नाम

खोलो

मुक्ति के द्वार

verse 3

अहंकार की ये दीवारेंअब ढहने लगी हैं तेरी करुणा की लहरेंमुझको बहने लगी हैं न मैं रहा, न मेरी कोई पहचानतू ही है धड़कन, तू ही है प्राण

bridge

सागर की गहराई में जैसेएक बूंद खो जाती हैवैसे ही मेरी आत्मातुझमें समा जाती हैकोई तर्क नहीं, कोई शोर नहींबस प्रेम की डोर हैप्रेम की डोर है

chorus

मेरे प्रभु, तुम ही आधार होमेरे मन का तुम ही संसार होसांसों की माला में नाम तुम्हारातुम ही किनारा, तुम ही सहारा

verse 4

अब तो बस एक ही चाहत हैतुझे हर पल देखूँतेरी रज़ा में हीअपनी तक़दीर को लेखूँ शांत है मन, शीतल है तनतेरी कृपा से महका है ये जीवन

call-and-response
बोल

ओम् शांति

सुन

ओम् शांति

बोल

ओम् शांति

सुन

ओम् शांति

बोल

ओम् शांति

महसूस कर

ओम् शांति

bridge

अंधेरे के इस सफ़र मेंतुम ही उजाला होमेरी हर एक उलझन कातुम ही तो ताला होखो गया मैं तुझमें ऐसेजैसे चाँद में चांदनीअब तो बस तू ही तू हैमेरे जीवन की रागिनी

chorus

मेरे प्रभु, तुम ही आधार होमेरे मन का तुम ही संसार होसांसों की माला में नाम तुम्हारातुम ही किनारा, तुम ही सहारा

outro

ओम् शांति, ओम् शांतिमेरे भीतर का आकाश तू हैमेरी हर एक प्यास तू हैतू ही हैबस तू ही हैशांति... शांति... शांति...

तुम ही आधार प्रभु

जगमोहन दास

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