मंज़िल का सिक्का
धूल-कण
देसी हिप हॉप
About
यह ट्रैक भारी 808 सब-बास और तेज़ ट्रैप हाई-हैट्स के साथ पारंपरिक भारतीय तबले की थाप का एक अनूठा मिश्रण है। इसमें बहुभाषी रैपिंग के माध्यम से संघर्ष और सफलता की कहानी को आधुनिक देसी हिप हॉप शैली में पिरोया गया है।
Lyrics
गली की धूल में नाम मेरा लिखा हैये खामोश लबों का शोर अब बिका हैसपनों की भीड़ में खोया जो था मैंअब वही इंसान फिर से खड़ा है
ईंटों की दीवारें, ये तंग सी गलियाँमेरी मेहनत की गवाह हैं ये सारी तलियाँजेब खाली थी पर इरादे थे भारीकिस्मत से लड़ने की तैयारी थी जारीधूप में जल के जो सोना बना हैवही तो आज अपना लोहा तना हैसब कहते थे तू राह से भटक जाएगापर देख, मंज़िल पे अब मेरा ही सिक्का चलेगा
आँखों में अंगारे, सीने में आग हैमेरी अपनी ही दुनिया, मेरा अपना राग हैजो कल तक गिराते थे, आज वो देखते हैंमेरी कामयाबी के किस्से वो फेरते हैं
उठ खड़ा हुआ मैं, अब रुकना नहीं हैये जीत का जश्न है, अब झुकना नहीं हैमेरी रूह में ये रफ़्तार दौड़ती हैमेरी मेहनत ही अब तकदीर मोड़ती है
शहर की शोर में, अपनी ही धुन हैमेरे लफ्जों में अब ये सारा जुनून हैकागज के पन्नों पे सच उतारता हूँमैं खुद अपनी ही आग को संवारता हूँकोई शोर नहीं, बस काम मेरा बोलेगावक्त आने दे, हर ताला ये खोलेगाजो कल तक कहते थे कि कुछ नहीं होगाआज वही देख के मेरा दम डोलेंगे
रास्ता कठिन है पर चलना मुझे हैअंधेरी रात में भी जलना मुझे हैजो खोया था पीछे, उसे भूलना हैअब बस आगे की ही राह चुनना है
उठ खड़ा हुआ मैं, अब रुकना नहीं हैये जीत का जश्न है, अब झुकना नहीं हैमेरी रूह में ये रफ़्तार दौड़ती हैमेरी मेहनत ही अब तकदीर मोड़ती है
नाम गूँजेगा, ये शहर सुनेगामेरा हर एक लफ्ज, अब तू बुनेगाउठ खड़ा हुआ हूँ, अब रुकना नहीं हैये जीत मेरी है, अब झुकना नहीं है
मंज़िल का सिक्का
धूल-कण
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