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Duration3:08

श्याम सुंदर की महिमा

बंसीधर शर्मा

भजन

About

यह एक पारंपरिक भजन है जिसमें हारमोनियम की मधुर धुन और तबले का लयबद्ध चक्र शामिल है। इसमें एक सामुदायिक कॉल-एंड-रिस्पॉन्स संरचना है जो भक्ति के चरम तक पहुँचते हुए मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है।

Lyrics

intro

मन की वीणा के तार झनझनाएअधरों पर बस तेरा नाम आएशून्य में भी तेरा वास हैतू ही मेरी अंतिम प्यास है

verse

भटक रही थी रूह मेरी कब सेदूरी मिटा दी तूने ही सब सेधूल में लिपटी मेरी ये कायातेरी शरण में ही सुख पायादीपक बुझा था आशा का मेरातूने ही आकर दिया ये सवेरा

chorus

श्याम सुंदर की महिमा गाऊंचरणों में मैं शीश झुकाऊंतू ही विधाता तू ही सहाराभक्ति का सागर तू ही किनारा

call-and-response
ओ मेरे मन के मीत

तेरा ही है गीत

ओ मेरे मन के मीत

तेरा ही है गीत

दुख हरने वाले

आजा तू आने वाले

दुख हरने वाले

आजा तू आने वाले

crescendo

तेरी ज्योति से जगमगाया ये मनतेरी भक्ति में डूबा है तन-मनसाँस-साँस में बस तेरा नाम हैतू ही भोर तू ही मेरी शाम हैसब कुछ तेरा तुझको अर्पणस्वीकार कर ले मेरा ये तर्पण

chorus

श्याम सुंदर की महिमा गाऊंचरणों में मैं शीश झुकाऊंतू ही विधाता तू ही सहाराभक्ति का सागर तू ही किनारा

outro

नाम जपूं मैं सुबह-शामबस तेरा ही है नामशांति का वास होतुझमें ही आकाश होबस तू ही... बस तू ही...

श्याम सुंदर की महिमा

बंसीधर शर्मा

Preview

श्याम सुंदर की महिमा by बंसीधर शर्मा | EchoLoRA: Generate a Song with AI