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अमृत की शीतल छाया
Duration5:18

अमृत की शीतल छाया

गायत्री वशिष्ठ

भजन

About

एक पारंपरिक भक्ति रचना जो राग-आधारित माधुर्य और प्राकृतिक तबला ताल पर टिकी है। यह गीत हारमोनियम के सूक्ष्म स्वरों और आह्वान-प्रतिक्रिया (call-and-response) गायन शैली के माध्यम से एक गहन आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।

Lyrics

intro

मेरे मन के सूने आंगन में, तेरी ज्योति का उजियारामैं हूँ भटका हुआ राही, तू ही किनारा, तू ही सहाराअंधियारे में खोई राहें, अब तुझमें ही खो जाने देमेरी रूह के हर कोने को, अमृत से भिग जाने दे

verse

सांसों की हर एक माला पर, तेरा नाम ही जपती हूँदुनिया की इन गलियों से मैं, अब तो दूर निकलती हूँन कोई चाहत, न कोई बंधन, बस तेरी ही परछाईंतू ही आदि, तू ही अंत, तू ही मेरी सच्चाईमिट जाए ये 'मैं' का पर्दा, तू ही बस नजर आएतेरी मर्जी में ही मेरी, हर मुश्किल ढल जाए

call-and-response
गाओ रे मनवा, गाओ रे

मेरे प्रभु का नाम सुनाओ रे

जपो रे मनवा, जपो रे

प्रेम का दीप जलाओ रे

खो जाओ उसमें, खो जाओ

खुद को आज मिटाओ रे

पा जाओ उसको, पा जाओ

मुक्ति का मार्ग अपनाओ रे

verse

नदी की धारा जैसे सागर में, जाके एक हो जाती हैमेरी आत्मा वैसे ही तुझमें, खुद को खोने आती हैतू ही धड़कन, तू ही स्पंदन, तू ही मेरा आधारतेरी कृपा की शीतल छाया, मिटा दे हर विकारतुझको पाने की प्यास में, मैं तो खुद से दूर हुईतेरी भक्ति के रंग में रंगे, मेरी हर एक रीत हुई

crescendo

उठ रही है लहरें मन में, तेरे नाम का शोर लिएबिखर रही हैं खुशबू तेरी, चारों ओर लिएतू ही सत्य है, तू ही सुंदर, तू ही परम प्रकाशमिट जाए ये भव-सागर का, हर एक झूठा आभासतेरी शरण में, तेरी शरण में, नतमस्तक ये शीशतू ही स्वामी, तू ही दाता, तू ही जग का ईश

call-and-response
तू ही है, तू ही है

मेरा सब कुछ तू ही है

तू ही है, तू ही है

मेरा रब भी तू ही है

तेरा नाम ही, तेरा नाम ही

मेरी साँसों का विश्राम है

तेरा ध्यान ही, तेरा ध्यान ही

मेरा सच्चा काम है

outro

शांत हुआ ये मन का सागर, अब कोई हलचल नहींतेरी गोद में सिर रखकर, कोई भी कल नहींबस तू ही तू है, बस तू ही तू हैशून्य में भी, पूर्ण में भी, बस तू ही तू हैओम शांति, ओम शांति, ओम शांतिओम शांति, ओम शांति, ओम शांति

अमृत की शीतल छाया

गायत्री वशिष्ठ

Preview

अमृत की शीतल छाया by गायत्री वशिष्ठ | EchoLoRA: Generate a Song with AI