सुनहरी यादें
अर्णव मेहरा
इंडि-पॉप
About
यह गाना एक आधुनिक इंडि-पॉप रचना है जो पुरानी यादों और शहरी जीवन के बीच के विरोधाभास को दर्शाती है। इसमें तबला और ढोलक की पारंपरिक थाप को सिंथेसाइज़र और इलेक्ट्रिक गिटार की आधुनिक धुनों के साथ खूबसूरती से पिरोया गया है।
Lyrics
ओह-ओह, ये हवाएंकुछ कह रही हैं आजओह-ओह, पुरानी यादेंफिर लौट आई हैं पास
गली के वो नुक्कड़, वो चाय की दुकानतेरी वो हँसी, जैसे कोई नई पहचानसाइकिल की घंटी, वो बेफिक्र शामेंलिखे थे हमने जो, कच्चे से नामेंभीगी सी बारिश, और वो कागज़ की नावदिल में छुपाए बैठे, हम कितने ही घाव
अब शहर की ये भीड़, भागती हुई दौड़पर दिल मेरा कहीं, खड़ा है उस मोड़जहाँ तूने कहा था, कभी न जाना छोड़जहाँ तूने कहा था, कभी न जाना छोड़
वो दिन थे सुनहरे, वो पल थे प्यारेआज भी ढूँढूँ मैं, वो सारे सितारेतू पास नहीं है, पर यादें साथ हैंतेरे ही ख्यालों की, ये खूबसूरत रातेंओह-ओह, फिर लौट आओह-ओह, तू पास आ
मोबाइल की स्क्रीन पर, तेरी तस्वीरबदल गई है देखो, अब तो तकदीरमैसेज का इंतज़ार, वो टिक-टिक की आवाज़कहने को तो बहुत कुछ, पर लब हैं नाराज़पुराने वो गाने, जो सुनाए थे तूनेमहक रहे हैं आज भी, वो गुलाब जो चुने
अब शहर की ये भीड़, भागती हुई दौड़पर दिल मेरा कहीं, खड़ा है उस मोड़जहाँ तूने कहा था, कभी न जाना छोड़
वो दिन थे सुनहरे, वो पल थे प्यारेआज भी ढूँढूँ मैं, वो सारे सितारेतू पास नहीं है, पर यादें साथ हैंतेरे ही ख्यालों की, ये खूबसूरत रातें
क्या तू भी सोचती है, उन लम्हों के बारे में?क्या तू भी खोती है, उन पुरानी राहों में?वक़्त तो गुज़र गया, पर एहसास बाकी हैइश्क़ का ये सफर, अभी तो बाकी है
वो दिन थे सुनहरे, वो पल थे प्यारेआज भी ढूँढूँ मैं, वो सारे सितारेतू पास नहीं है, पर यादें साथ हैंतेरे ही ख्यालों की, ये खूबसूरत रातें
यादें साथ हैं...तू पास आ...वो सुनहरे दिन...फिर लौट आ...ओह-ओह, पास आ...ओह-ओह, लौट आ...
सुनहरी यादें
अर्णव मेहरा
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