शून्य की प्रतीक्षा
मेघदूत मिश्र
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत
About
यह रचना तानपुरा के निरंतर ड्रोन पर आधारित है, जो आलाप, जोड़ और झाला के पारंपरिक सोपानों से गुज़रती है। इसमें राग-आधारित माधुर्य और ताल चक्र का सूक्ष्म प्रयोग किया गया है, जो एक आध्यात्मिक और गहन अनुभव प्रदान करता है।
Lyrics
सांसों के इस खालीपन मेंढूंढूँ मैं तेरा पताअनकही सी एक प्यास हैजैसे ओस की एक बूंद का गिरनाशून्य में तन्हा, मैं हूँ खड़ाबस तेरी ही प्रतीक्षा में
मन की लहरों पे नाम तेरा लिखूँमिटाऊं उसे फिर एक बारजैसे हवाओं का कोई ठिकाना नहींवैसे ही मेरा ये इंतज़ारएक सुर में सिमट कर रह गई है रूह मेरीतुझसे ही शुरू, तुझपे ही खत्म ये संसार
तेज चलती है धड़कनें अबजैसे सावन की पहली झड़ीतारों की गूंज में खो गई हैमेरी हर एक उलझी हुई घड़ीतेरा ही नाम, तेरी ही धुनअब तो रग-रग में बस यही बसीबिन बोले सब कह गईये खामोशी जो आज है खिली
आजा कि अब तो शाम ढलने को आई हैमेरी रूह ने फिर से अंगड़ाई ली हैतू ही तो है मेरा हर एक ठिकानातुझमें ही खोकर अब मुझे है खो जानाये धड़कनें, ये सांसें, ये पल की रवानीतू ही है मेरी अधूरी सी कहानीआजा कि अब तो शाम ढलने को आई हैमेरी रूह ने फिर से अंगड़ाई ली हैतू ही तो है मेरा हर एक ठिकानातुझमें ही खोकर अब मुझे है खो जाना
शून्य की प्रतीक्षा
मेघदूत मिश्र
Preview