लहू की स्याही
आग़ाज़
इंडियन हिप हॉप
About
यह ट्रैक भारी 808 सब-बास और ट्रैप बीट्स का मिश्रण है, जिसमें सितार और तबला के क्लासिकल नमूनों को आधुनिक प्रोडक्शन के साथ बुना गया है। गीत में सामाजिक संघर्ष और व्यक्तिगत दृढ़ संकल्प को दर्शाया गया है, जो एक आक्रामक और प्रभावशाली प्रवाह के साथ पेश किया गया है।
Lyrics
धूल भरी ये राहें, पैरों में छाले हैंकिस्मत के पन्नों पर, ज़ख्मों के ताले हैंउठ खड़ा हो ऐ मुसाफिर, वक्त का ये इशारा हैतेरी मेहनत ही तेरा, इकलौता सहारा है
गली के नुक्कड़ पे, सपनो का मेला हैभीड़ में भी देखो, हर शख्स अकेला हैअमीर की तिजोरी में, गरीब का पसीना हैइसी जद्दोजहद में, जीना ही जीना हैऊँची इमारतों के, साये में दम घुटता हैयहाँ हक़ माँगने वाला, अक्सर ही लुटता हैसड़कों की गर्मी में, इरादे जो पकाए हैंहमने अपने रास्तों पर, खुद ही दिए जलाए हैं
कानों में गूँजती है, ज़माने की ये बातेंकाली स्याह रातों में, कटती हैं मुलाक़ातेंमगर हौसला मेरा, अब भी तो अडिग हैतूफानों से लड़ना, मेरा ही फ़र्ज़ है
ये मेरी आवाज़ है, जो सीना चीर के निकलेगीसच की ये मशाल, अंधेरों को पिघला देगीमिट्टी से जुड़ी है, मेरी हर एक कहानीलहू की स्याही से, लिखूँगा अपनी निशानीये मेरी आवाज़ है, जो सीना चीर के निकलेगीसच की ये मशाल, अंधेरों को पिघला देगी
किताबों के पन्नों में, जो सच कभी न आयावो मंज़र मैंने, अपनी आँखों से दिखायाअदब की महफिल में, शोर का आलम हैकलम मेरी काँपती नहीं, मेरा सर न खम हैजो गिर के संभलते हैं, वही तो सिकंदर हैंबाकी सब लोग तो, बस अपनी ही बेड़ियों के अंदर हैंखामोश लबों के पीछे, एक तूफ़ान पल रहा हैमेरा वजूद अब, खुद ही खुद से संभल रहा है
आसमान को छूने की, चाहत पुरानी हैये मेरी अपनी, एक अनकही कहानी हैनाज़ है मुझे अपनी, इन ज़मीन और जड़ों परमिटा दूँगा मैं हर लकीर, जो लिखी है हाथों की लकीरों पर
ये मेरी आवाज़ है, जो सीना चीर के निकलेगीसच की ये मशाल, अंधेरों को पिघला देगीमिट्टी से जुड़ी है, मेरी हर एक कहानीलहू की स्याही से, लिखूँगा अपनी निशानीये मेरी आवाज़ है, जो सीना चीर के निकलेगीसच की ये मशाल, अंधेरों को पिघला देगी
साँसें अभी बाकी हैं, सफर अभी जारी हैमेरी ये जीत, अब तो दुनिया पे भारी हैलिखते जाओ, बढ़ते जाओसूरज की पहली किरण संग, तुम भी मुस्कुराओबस चलते जाओ...बस चलते जाओ...
लहू की स्याही
आग़ाज़
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