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सावन की फुहार
Duration4:43

सावन की फुहार

माटी के सुर

भारतीय लोक संगीत

About

यह गीत पारंपरिक ढोलक और सारंगी की संगत में रचा गया है, जो मिट्टी की सोंधी खुशबू और सावन की यादें ताज़ा करता है। इसमें लोक संगीत की लयबद्ध गायकी और सूक्ष्म स्वर लहरियों का सुंदर मिश्रण है, जो पूरी तरह से प्राकृतिक और ध्वनिक वाद्ययंत्रों पर आधारित है।

Lyrics

intro

ओ रे ओ, माटी की गंध बुलाएसावन की पहली बूंद, मनवा हरषाएओ रे ओ, ओ रे ओ...

verse

खेतों में झूमती बाली, सोना बनके चमकेमेहनत की ये लकीरें, माथे पर हैं दमकेपगडंडी के मोड़ पर, खड़ा है बरगद पुरानायादों का है मेला यहाँ, और रीत का है आनाहाथों में हाथ लिए, हम चलें डगरियापिया के मिलन की आस, सजे मेरी नगरिया

refrain

रिमझिम बरसे बदरिया, मन में उठी उमंगरंगों की होली सजे, जब तू हो मेरे संगधरती का श्रृंगार है, ये सावन की फुहारजी भर के जी ले ज़रा, ओ राही मेरे यार

verse

पुरखों की ये सीख है, जो लहू में बहतीमर्यादा और प्रेम की, हर एक बात कहतीचाँद की ये चांदनी, आँगन में मुस्काएतारे भी छुप-छुप के, हम पे ही इतराएमिट्टी से जुड़े हैं तार, मिट्टी में ही खोनासपनों के शहर में, बस अपनापन ही होना

refrain

रिमझिम बरसे बदरिया, मन में उठी उमंगरंगों की होली सजे, जब तू हो मेरे संगधरती का श्रृंगार है, ये सावन की फुहारजी भर के जी ले ज़रा, ओ राही मेरे यार

instrumental-break
verse

सूरज की पहली किरण, जब ओस को छुएभोर भये पंछी भी, गीत गाते हुएकल क्या होगा किसे पता, आज में तू खो जाप्यार की ये मीठी धुन, तू भी तो सुन ले ज़रानदिया की ये धार जैसे, जीवन है बहतासच्चा वही है यहाँ, जो दिल की है कहता

refrain

रिमझिम बरसे बदरिया, मन में उठी उमंगरंगों की होली सजे, जब तू हो मेरे संगधरती का श्रृंगार है, ये सावन की फुहारजी भर के जी ले ज़रा, ओ राही मेरे यार

outro

सावन की ये फुहार, मन में है प्यारसावन की ये फुहार, बस तेरा इंतज़ारओ रे ओ, ओ रे ओ...माटी की गंध, यादों का संसारओ रे ओ, ओ रे ओ...

सावन की फुहार

माटी के सुर

Preview

सावन की फुहार by माटी के सुर | EchoLoRA: Generate a Song with AI