Skip to content
शून्य का सन्नाटा
Duration3:34

शून्य का सन्नाटा

ध्रुव-तरंग

इंडियन इलेक्ट्रॉनिक

About

यह ट्रैक पारंपरिक राग-आधारित मेलोडी और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक साउंडस्केप का एक जटिल मिश्रण है। इसमें तबला की पॉलीरिदम और सिंथेसाइज़र की गहरी परतों का उपयोग किया गया है, जो एक ध्यानमग्न और रहस्यमयी वातावरण बनाता है।

Lyrics

intro

हवाओं में घुली कोई पुरानी बात हैअंधेरे के सीने में छिपी एक रात हैसाँसों की लय में सिमटा हुआ है ये जहाँमैं हूँ यहाँ, या कहीं और हूँ अब कहाँ

raga-alap

सा रे गा मा, धुन ये पुरानी हैवक्त की चाल, एक दास्तान सुनानी हैआँखों के कोने में, धुंधली सी यादेंपरछाइयों से अब, कैसी ये फरियादें

build-up

धड़कन की रफ्तार में, एक नया शोर हैखुद को खोने का, अब कैसा ये दौर हैतारों की बिसात, और हम मोहरे बनेसपनों के धागे, अब और भी घने बुनेतेज़ होती सांसें, जैसे कोई नशा चढ़ेमंजिलें पीछे, और हम आगे बढ़े

drop

खो गए हम, रूह के इस पारबहते चले, बिन किसी आधारबिखरती रोशनी, सिमटता ये जालखुद ही सवाल, और खुद ही खयालहवाओं का साया, लहरों का शोरसब कुछ धुंधला, सब कुछ है और

breakdown

ठहर जा जरा, वक्त की इस डोर परक्या रखा है, इस बेमतलब के शोर परमिट्टी की खुशबू, या बिजली की चमकसब एक सा है, जब रूह जाए दमकन कोई किनारा, न कोई है नावबस एक सफर, और गहरे घाव

drop

खो गए हम, रूह के इस पारबहते चले, बिन किसी आधारबिखरती रोशनी, सिमटता ये जालखुद ही सवाल, और खुद ही खयालहवाओं का साया, लहरों का शोरसब कुछ धुंधला, सब कुछ है और

outro

खामोशियाँ अब, बातें करने लगी हैंतन्हाइयाँ भी, रास्ता बदलने लगी हैंसब शून्य में है, सब अंत में हैमैं भी वहीं हूँ, जो इस अनंत में हैबस एक गूँज, अब बाकी रही हैहवाओं में कोई, कहानी कही है

शून्य का सन्नाटा

ध्रुव-तरंग

Preview