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पगडंडी के गीत
Duration4:28

पगडंडी के गीत

सूरजमुखी लोक दल

Indian Folk

About

यह गीत ग्रामीण भारत की सादगी और मिट्टी से जुड़े गहरे रिश्तों को दर्शाता है। इसमें तबला और हारमोनियम की जुगलबंदी के साथ लयबद्ध गायन शैली का उपयोग किया गया है, जो श्रोता को सीधे गाँव की पगडंडियों पर ले जाता है।

Lyrics

intro

ओ रे मनवा, जाग ज़रा,माटी की ये गंध बुलाए।ओ रे राही, रुक जा ज़रा,बीती यादें पास बुलाए।

verse

खेतों में जब धूप खिले,सोना बनकर धान पके।हाथों में जब मेहनत हो,किस्मत के सब द्वार खुले।बैल चलें अपनी धुन में,पगडंडी पर धूल उड़े।माँ की ममता, पिता का साया,घर की चौखट याद रहे।

refrain

ओ मेरी माटी, ओ मेरे गाँव,तेरे आँचल में ही पाऊँ ठाँव।नदिया की धारा, पीपल की छाँव,तेरी यादों में ही खो जाऊँ।

verse

सावन की पहली फुहार,मन में जगाए मीठी तड़प।कागज की वो कश्ती मेरी,बहती जाए बिना किसी डर।मेले में वो शोर मचाना,गुब्बारे और चूड़ी की खनक।बचपन की वो भोली बातें,आज भी है मन में चमक।

refrain

ओ मेरी माटी, ओ मेरे गाँव,तेरे आँचल में ही पाऊँ ठाँव।नदिया की धारा, पीपल की छाँव,तेरी यादों में ही खो जाऊँ।

instrumental-break
verse

दीया जलाकर देहरी पर,सूरज को हम नमन करें।पुरखों की जो सीख मिली है,उसको सिर माथे धरे।रिश्ते-नाते, प्यार की भाषा,यही तो है अपनी शान।मिट्टी का ये कर्ज चुकाना,यही तो है अपनी जान।

refrain

ओ मेरी माटी, ओ मेरे गाँव,तेरे आँचल में ही पाऊँ ठाँव।नदिया की धारा, पीपल की छाँव,तेरी यादों में ही खो जाऊँ।

outro

जाग ज़रा, ओ मनवा जाग,माटी की ये गंध बुलाए।लौट चलें अब अपने घर,जहाँ प्यार के दीप जलाए।लौट चलें अब अपने घर,जहाँ प्यार के दीप जलाए।

पगडंडी के गीत

सूरजमुखी लोक दल

Preview

पगडंडी के गीत by सूरजमुखी लोक दल | EchoLoRA: Generate a Song with AI