ज़मीन का बेटा
धूल-कवि
इंडियन हिप हॉप
About
यह ट्रैक भारी 808 सब-बास और क्लासिक तबला लूप्स का एक शक्तिशाली मिश्रण है, जो शहरी संघर्ष की कहानी बयां करता है। इसमें हारमोनियम के सूक्ष्म सुरों के साथ आक्रामक फ्लो और सामाजिक-राजनीतिक टिप्पणियों का समावेश है।
Lyrics
गली की धूल में दबे हैं ख्वाब कितनेमकान छोटे पर हौसले हैं आसमान जितनेसुन मेरी बात, ये वक्त की पुकार हैअंधेरी रातों के बाद, अब सुबह का इंतज़ार है
सीमेंट की इन दीवारों में दम घुटता हैपर मेहनत का पसीना हर ज़ंजीर तोड़ता हैफटी हुई चप्पलें, पर नज़रों में आग हैइस शहर की भीड़ में, खुद की ही तलाश हैपेट की भूख से बड़ी, ज़मीर की ये प्यास हैअपनों के वास्ते, कांटों पर चलने का साहस हैवो कहते थे कि तू कुछ कर नहीं पाएगाआज वही खड़ा, मेरी कामयाबी देख घबराएगा
वक़्त बदलता है, जैसे मौसम की मारमंजिलें दूर सही, पर इरादे हैं तैयारआँखों में नमी है, पर लबों पर मुस्कानमिट्टी की खुशबू में बसी मेरी पहचान
उठ खड़ा हो, अब तू झुकना छोड़ देअपनी तक़दीर की ये कड़ियाँ तोड़ देतेरा नाम गूँजेगा, जब तू लड़ेगाइस ज़मीन का बेटा है, तू ही बढ़ेगाहाँ तू ही बढ़ेगा, तू ही बढ़ेगा
चौराहों पर खड़े होकर मैंने सच को देखा हैअमीरी की चमक में, गरीबों को रोते देखा हैसियासत के खेल में, मोहरे हम बन जाते हैंदिखावे के वादे, काग़ज़ पर ही रह जाते हैंपर अब खामोशी टूटेगी, आवाज़ बुलंद होगीमेरी कलम की स्याही से, ये दुनिया दंग होगीनक़ली चेहरों के पीछे, अब नकाब उतरेंगेसच के सिपाही, अब मैदान में उतरेंगे
ये सड़कें गवाह हैं, मेरे संघर्ष कीये रातें गवाह हैं, मेरे धैर्य कीमैं हारा नहीं, बस थोड़ा ठहर गया थाअपनी जड़ों को ढूँढने, मैं पीछे मुड़ गया थाअब फिर से दौड़ना है, शिखर को छूना हैइस दुनिया की भीड़ में, अपना नाम बुनना है
माँ की वो दुआएं, अब काम आ रही हैंमेरी मेहनत की फसलें, अब खिल रही हैंनफरत की आग में, खुद को जलाना नहींअपनों के साथ को, कभी भुलाना नहींइतिहास के पन्नों में, नाम दर्ज कराना हैआने वाली पीढ़ी को, ये राह दिखाना हैडर का साया अब, मुझसे दूर हो गयामेरा हर एक सपना, अब मज़बूत हो गया
उठ खड़ा हो, अब तू झुकना छोड़ देअपनी तक़दीर की ये कड़ियाँ तोड़ देतेरा नाम गूँजेगा, जब तू लड़ेगाइस ज़मीन का बेटा है, तू ही बढ़ेगाहाँ तू ही बढ़ेगा, तू ही बढ़ेगा
ज़मीन से जुड़े हैं, आसमान तक जाएंगेअपनी मेहनत का परचम, हर तरफ लहराएंगेये सफर जारी है, ये सफर जारी हैमेरी कलम ही अब, मेरी तैयारी हैबस अब रुकना नहीं, बस अब झुकना नहींअपनी मिट्टी का कर्ज, मुझे चुकाना हैबस आगे ही जाना है।
ज़मीन का बेटा
धूल-कवि
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