मेरे नाथ का बुलावा
पंडित विश्वनाथ दास
Indian Devotional
About
यह गीत एक गहन भक्तिपूर्ण रचना है जिसमें हारमोनियम की मधुर धुन और तबले की लयबद्ध ताल का अद्भुत संगम है। इसमें गायक की भावपूर्ण आवाज़ ईश्वर के प्रति समर्पण और शांति के गहरे भावों को व्यक्त करती है, जो श्रोता को ध्यान और आध्यात्मिकता में डुबो देती है।
Lyrics
मेरे मन के अँधियारे में, एक दीप जला दे।मेरी रूह की प्यास को, तू आके बुझा दे।
साँसों की डोरी में तेरा ही नाम पिरोया है,मैंने इस भीड़ में खुद को तुझमें ही खोया है।पलकें झुकाऊँ तो तेरा ही नूर दिखता है,ये दिल अब तो बस तेरी ही राह पे टिकता है।भटका हुआ मुसाफिर हूँ, तू ही किनारा है,इस बेबस कश्ती का तू ही सहारा है।
ओ मेरे नाथ, अब तो आ जा,मेरी धड़कन में खुद को बसा जा।तुझसे ही शुरू, तुझपे ही खत्म,तू ही है मंज़िल, तू ही है दम।
- तू ही है प्राण,
- तू ही जहान,
- ले ले ये जान,
- तू ही है मान।
ना मंदिर की चाहत, ना पूजा का दिखावा,बस तेरे प्रेम का, मीठा सा बुलावा।अहंकार की दीवारें, पल में ढह जाएँगी,जब तेरी करुणा की लहरें, मुझमें बह जाएँगी।मैं शून्य सा खड़ा, तू ही विस्तार है,मेरे भीतर छिपा, वही अपरंपार है।
ओ मेरे नाथ, अब तो आ जा,मेरी धड़कन में खुद को बसा जा।तुझसे ही शुरू, तुझपे ही खत्म,तू ही है मंज़िल, तू ही है दम।
तू ही है, बस तू ही है।मेरे भीतर का सन्नाटा, अब गूँज रहा है।तू ही है।सब तुझमें ही समाया है।तू ही है।
मेरे नाथ का बुलावा
पंडित विश्वनाथ दास
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