शून्य में अर्पण
शून्यवाणी
भक्ति संगीत
About
यह भक्ति रचना राग-आधारित माधुर्य और पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे हारमोनियम और तबले के सूक्ष्म मेल से बनी है। इसमें एक शांत और ध्यानमग्न अनुभव प्रदान करने के लिए प्राकृतिक ध्वनिक ताल और भावपूर्ण गायन का उपयोग किया गया है।
Lyrics
ओम् शांति, ओम् अनंतमन की प्यास, बुझे आजसब कुछ तेरा, मैं कुछ नहींशून्य में ही, है सब साज़
भीतर के इस अंधेरे मेंएक दीया सा जलने लगाखुद की खोज में निकला थातुझमें ही अब ढलने लगाअहंकार की ये दीवारेंअब धीरे-धीरे गिरने लगींतेरी करुणा की बूंदेंमेरी रूह को छूने लगीं
मन रमे, तेरा नाम जपे
मन रमे, तेरा नाम जपे
दुख मिटे, सुख बरसे
दुख मिटे, सुख बरसे
सागर की लहरों सा उठा ये भावमिट गया सारा, मेरा अपना लगावतू ही सत्य, तू ही आधारतू ही पार, तू ही मझधारअमिट ये ज्योति, जाग उठीमेरी चेतना, राह पा गई
अब कोई चाह नहीं बाकीबस तेरा ही अहसास हैसांसों की इस माला मेंतेरी ही तो मिठास हैसब कुछ तुझपे सौंप दियामैं तो बस एक अर्पण हूँतेरी रज़ा में जीने वालाएक छोटा सा दर्पण हूँ
मन रमे, तेरा नाम जपे
मन रमे, तेरा नाम जपे
दुख मिटे, सुख बरसे
दुख मिटे, सुख बरसे
ओम् शांति, ओम् अनंतओम् शांति, ओम् अनंतसब तेरा, सब तेरामैं तो बस, तेरा ही अंश हूँओम् शांति, ओम् शांति।
शून्य में अर्पण
शून्यवाणी
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