Skip to content
♪
Duration4:20

शून्य में अर्पण

शून्यवाणी

भक्ति संगीत

About

यह भक्ति रचना राग-आधारित माधुर्य और पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे हारमोनियम और तबले के सूक्ष्म मेल से बनी है। इसमें एक शांत और ध्यानमग्न अनुभव प्रदान करने के लिए प्राकृतिक ध्वनिक ताल और भावपूर्ण गायन का उपयोग किया गया है।

Lyrics

intro

ओम् शांति, ओम् अनंतमन की प्यास, बुझे आजसब कुछ तेरा, मैं कुछ नहींशून्य में ही, है सब साज़

verse

भीतर के इस अंधेरे मेंएक दीया सा जलने लगाखुद की खोज में निकला थातुझमें ही अब ढलने लगाअहंकार की ये दीवारेंअब धीरे-धीरे गिरने लगींतेरी करुणा की बूंदेंमेरी रूह को छूने लगीं

call-and-response
गाओ

मन रमे, तेरा नाम जपे

गाओ

मन रमे, तेरा नाम जपे

गाओ

दुख मिटे, सुख बरसे

गाओ

दुख मिटे, सुख बरसे

crescendo

सागर की लहरों सा उठा ये भावमिट गया सारा, मेरा अपना लगावतू ही सत्य, तू ही आधारतू ही पार, तू ही मझधारअमिट ये ज्योति, जाग उठीमेरी चेतना, राह पा गई

verse

अब कोई चाह नहीं बाकीबस तेरा ही अहसास हैसांसों की इस माला मेंतेरी ही तो मिठास हैसब कुछ तुझपे सौंप दियामैं तो बस एक अर्पण हूँतेरी रज़ा में जीने वालाएक छोटा सा दर्पण हूँ

call-and-response
गाओ

मन रमे, तेरा नाम जपे

गाओ

मन रमे, तेरा नाम जपे

गाओ

दुख मिटे, सुख बरसे

गाओ

दुख मिटे, सुख बरसे

outro

ओम् शांति, ओम् अनंतओम् शांति, ओम् अनंतसब तेरा, सब तेरामैं तो बस, तेरा ही अंश हूँओम् शांति, ओम् शांति।

शून्य में अर्पण

शून्यवाणी

Preview