शून्य में मिलन
संत आत्मानंद
भारतीय शास्त्रीय भक्ति संगीत
About
यह एक गहन भक्तिमय रचना है जिसमें हारमोनियम की मधुर धुन और तबले की लयबद्ध थाप का सुंदर मेल है। स्वर-प्रधान व्यवस्था श्रोता को ध्यान और आत्म-साक्षात्कार की अवस्था में ले जाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
Lyrics
मन की लहरें शांत हुईं अबभीतर का कोना जाग उठाशून्य में खोजा, शून्य में पायाखुद से खुद का मेल हुआ
सांसों की माला पे तेरा नाम पिरोया हैपलकों की ओट में मैंने ख़ुद को खोया हैन कोई मंज़िल है, न कोई रास्ता बाकीतेरी ही धुन में ये मन अब तो सोया हैमिट गए बंधन, खुल गए सारे द्वारबहने लगी है रूह में तेरी ही पुकार
ओ मेरे स्वामी, ओ मेरे प्रभुतुझमें ही खो जाऊं, तुझमें ही जी लूंमिट जाए ये मैं, रह जाए तू हीतेरी ही राहों में सब कुछ मैं दे दूं
बाहर की दुनिया का शोर अब सुनाई न देतुझसे जो जुड़ी है वो डोर दिखाई न देअंधियारे मन में एक दीया जलाया हैतेरी कृपा का ये नूर जो छाया हैबिखरे थे जो टुकड़े, वो जुड़ गए आजतू ही है साज़ मेरा, तू ही आवाज़
हे नाथ!
सुध ले मेरी!
तू ही आधार!
तू ही संसार!
नादान था मैं, जो बाहर ढूँढता रहापत्थरों की मूरत में ख़ुद को पूजता रहापर अंदर जो झाँका तो तू ही मिलाहर धड़कन में जैसे कोई फूल खिलाये कैसा मिलन है, ये कैसा नशातेरी ही भक्ति में अब तो बसा
न कोई शिकायत, न कोई अब प्यास हैतू ही तो मेरे हर सांस का विश्वास हैमिटती है दूरी, बढ़ती है प्रीततेरी ही महिमा है, तेरी ही जीतआँखों के कोने से बहता ये नीरधो दे मेरे सारे पुराने लकीर
ओ मेरे स्वामी, ओ मेरे प्रभुतुझमें ही खो जाऊं, तुझमें ही जी लूंमिट जाए ये मैं, रह जाए तू हीतेरी ही राहों में सब कुछ मैं दे दूं
सब कुछ समर्पण, सब कुछ तेरातू ही सवेरा, तू ही अंधेरामिट गई हस्ती, मिट गया भेदतू ही है अब तो मेरा वेद
तेरा ही ध्यान!
तेरा ही मान!
तू ही है सत्य!
तू ही है नित्य!
शान्ति, शान्ति, शान्तिमन में बस शान्तितू ही है, तू ही हैसिर्फ तू ही हैअनंत... अनंत... अनंत...
शून्य में मिलन
संत आत्मानंद
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