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Duration5:20

पुरखों की गूँज

ग्राम्य स्वर संगम

Indian Folk

About

यह गीत पारंपरिक भारतीय लोक संगीत की जड़ों को दर्शाता है, जिसमें ढोलक की थाप और हारमोनियम की मधुर धुन का मेल है। इसमें लयबद्ध गायन और एक विशिष्ट मोडल मेलोडी का उपयोग किया गया है जो ग्रामीण भारत की जीवंत संस्कृति और पुरानी यादों को जीवित करता है।

Lyrics

intro

ओ रे मनवा, जाग ज़रामिट्टी की खुशबू को थाम लेसमय की धारा में बहते चलपुरखों की यादों को नाम दे

verse 1

खेतों की मेड़ों पर बिखरी है धूप सुनहरीमेरे गाँव की गलियों में गूँजे है तान ये गहरीओढ़ के बैठी है धरती चुनर धानीनदियों के सीने में लिपटी है पुरानी कहानीसूरज की पहली किरण जब माथे को चूमेहवाओं के संग खेत झूम-झूम कर घूमे

refrain

मिट्टी से उपजे हैं हम, मिट्टी में मिल जाना हैप्यार की इस रीत को बस गाते ही जाना हैओ मेरे देश की माटी, तू ही तो प्राण हैतेरी गोद में पलना, यही तो वरदान है

verse 2

पीपल की छाँव में बैठी है बूढ़ी दादीसुना रही है किस्से, जैसे कोई शहज़ादीतारों की छाँव में बीती है रातें सारीचाँद की चांदनी में चमकती है यादें प्यारीबचपन की शरारत, वो दौड़ती हुई पगडंडीयादें तो जैसे अब भी है एकदम ठंडी-ठंडी

instrumental-break
verse 3

सावन की फुहारों ने जब प्यास बुझाई हैकोयल की कूक ने फिर से याद दिलाई हैआँगन में तुलसी का पौधा भी मुस्काता हैदीपक की लौ में कोई अपना नज़र आता हैत्योहारों की रंगत में खोया है पूरा गाँवसबके लबों पर बस एक ही है नाम

refrain

मिट्टी से उपजे हैं हम, मिट्टी में मिल जाना हैप्यार की इस रीत को बस गाते ही जाना हैओ मेरे देश की माटी, तू ही तो प्राण हैतेरी गोद में पलना, यही तो वरदान है

verse 4

बदली है दुनिया, मगर जड़े अभी भी वही हैंपीढ़ियों के वादे, जो आज भी ज़हन में कहीं हैंसच्चाई की राह पर चलना ही तो धर्म हैमेहनत की लकीरों में ही छिपा असली मर्म हैहँसते हुए काटना है अब जीवन की ये फसलकल की चिंता छोड़, आज में ही हो जा तू सफल

instrumental-break
verse 5

संध्या की आरती में गूँजती वो घंटियाँदूर कहीं बजती हुई, जैसे यादों की पट्टियाँनदी के किनारे खड़ा, मैं देखता हूँ आसमाँरंगों का ये मेला, कैसा है ये जहाँहर एक पल में बसी है एक नई उमंगजीवन के इस खेल में, हम सब हैं एक ही रंग

refrain

मिट्टी से उपजे हैं हम, मिट्टी में मिल जाना हैप्यार की इस रीत को बस गाते ही जाना हैओ मेरे देश की माटी, तू ही तो प्राण हैतेरी गोद में पलना, यही तो वरदान है

outro

मिट्टी से नाता, मिट्टी ही सहारागूँजता रहे ये गीत, जग हो प्याराओ मनवा, अब तू भी मुस्कुरामिट्टी ही है मंज़िल, मिट्टी ही खुदामिट्टी ही खुदा...मिट्टी ही खुदा...

पुरखों की गूँज

ग्राम्य स्वर संगम

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पुरखों की गूँज by ग्राम्य स्वर संगम | EchoLoRA: Generate a Song with AI