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माटी की गंध
Duration5:01

माटी की गंध

आलोक और लोक-धुनी

भारतीय लोक संगीत

About

यह गीत पारंपरिक ढोलक की थाप और सारंगी की मर्मस्पर्शी धुन के साथ मिट्टी की सोंधी खुशबू को जीवंत करता है। इसमें लोकगीतों की लयबद्ध गायकी और मोडल मेलोडी का समावेश है, जो श्रोता को अपनी जड़ों की याद दिलाता है।

Lyrics

intro

ओ रे ओ, माटी की गंध बुलाएसावन की पहली बूंद, मन में हरियाली लाएनदियों की कल-कल, और हवाओं का शोरमेरा जिया डोले, जैसे पंछी हो किसी ओर

verse 1

खेतों की मेड़ों पे, सूरज की लाली हैबचपन की यादें, सब आज भी निराली हैदादी की कहानियाँ, वो नानी का वो प्यारपीपल की छाँव में, बीता था वो संसारमिट्टी के चूल्हे की, वो सौंधी सी महकगाँव की गलियों में, आज भी है वो चहक

refrain

ओ मेरे राही, घर को लौट के आ जामिट्टी की खुशबू, तुझे बुलाती है आजाओ मेरे राही, घर को लौट के आ जाअपनी जड़ों की ओर, तू कदम बढ़ा जा

verse 2

चाँदनी रात में, वो ढोल की थापदुखों को हर ले, जैसे मन का संतापसिर पे है साफा, और हाथों में है कामईश्वर की भक्ति में, सुबह और शाममेहनत की रोटी, और पसीने का मोलखुशियों के सागर में, जैसे घुले हों घोल

refrain

ओ मेरे राही, घर को लौट के आ जामिट्टी की खुशबू, तुझे बुलाती है आजाओ मेरे राही, घर को लौट के आ जाअपनी जड़ों की ओर, तू कदम बढ़ा जा

instrumental-break
verse 3

सरसों के पीले फूल, झूमते हैं यारपतझड़ के बाद, फिर आता है बहारबदलाव की हवाएँ, चलती हैं हर मोड़पर रिश्तों की डोर, ना कभी लेना छोड़बुजुर्गों का साया, जैसे बरगद का पेड़जीवन की राहों में, बस प्यार की है भेड़

refrain

ओ मेरे राही, घर को लौट के आ जामिट्टी की खुशबू, तुझे बुलाती है आजाओ मेरे राही, घर को लौट के आ जाअपनी जड़ों की ओर, तू कदम बढ़ा जा

instrumental-break
verse 4

कोयल की कूक, जैसे मन में घुलेयादों के पन्ने, आज फिर से खुलेदीयों की रोशनी, अंधेरों को भगाएसच्ची खुशी देखो, अपनों में ही पाएमिट्टी से जुड़े हैं, मिट्टी में मिल जानायही तो है जीवन का, अनमोल फसाना

refrain

ओ मेरे राही, घर को लौट के आ जामिट्टी की खुशबू, तुझे बुलाती है आजाओ मेरे राही, घर को लौट के आ जाअपनी जड़ों की ओर, तू कदम बढ़ा जा

outro

सावन की पहली बूंद, मन को भिगोती हैयादों की माला, फिर पिरोती हैघर को लौट आ, घर को लौट आमिट्टी बुलाती है, लौट आ...लौट आ...

माटी की गंध

आलोक और लोक-धुनी

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माटी की गंध by आलोक और लोक-धुनी | EchoLoRA: Generate a Song with AI