हे प्रभु तू ही किनारा
जगमोहन जोशी
भजन
About
यह भजन हारमोनियम की मधुर धुन और तबले के पारंपरिक ताल चक्र पर आधारित है। इसमें एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव है जो कॉल-एंड-रिस्पॉन्स गायन शैली के माध्यम से धीरे-धीरे तीव्रता की ओर बढ़ता है।
Lyrics
मन की वीणा के तार झनझनाएअधरों पर बस तेरा नाम आएभीतर की प्यास अब बुझने लगी हैतेरी चौखट पर रूह झुकने लगी है
खोया था मैं खुद की ही माया मेंउलझा हुआ था झूठी काया मेंअब तो बस तेरी एक झलक पा लीजीवन की खाली डगर सजा लीजैसे भँवर से किनारा मिला होजैसे बंजर में फूल खिला हो
हे प्रभु, तू ही आधार मेरातू ही है नैया, तू ही किनारातेरी शरण में आया हूँ देवास्वीकार कर ले ये भाव-धारा
जय हो मुरारी
कुंज बिहारी
गिरधर नागर
करुणा सागर
तू ही है सूरज, तू ही है तारातू ही है जग का पालनहाराअंधियारे मन में तू दीप जला देभटके हुए को राह दिखा देपल-पल तेरी ही धुन गाता रहूँतेरी ही यादों में खो जाता रहूँ
हे प्रभु, तू ही आधार मेरातू ही है नैया, तू ही किनारातेरी शरण में आया हूँ देवास्वीकार कर ले ये भाव-धारा
तेरी महिमा अपरम्पार है, प्रभुतेरा ही नाम संसार है, प्रभुसाँस-साँस में बस तू ही समायामिट गई सारी मोह की छायातेरी भक्ति में ही मुक्ति है पाईमिट गई अब तो हर एक जुदाई
राधे-राधे
श्यामा-श्यामा
केशव माधव
नटवर नागर
तू है सागर, मैं हूँ बूंद सातू है सूरज, मैं हूँ धूप सातुझसे ही शुरू, तुझपे ही अंततू ही है मेरा आदि-अनंत
तेरी कृपा का ये शीतल झरनासीख लिया मैंने अब तो तरनासब कुछ तेरा, मेरा कुछ भी नहींतू ही है स्वामी, मैं हूँ कहीं नहीं
नाम जपते-जपते ये रैन बीतेतेरी ही धुन में ये श्वास जीतेशांति ही शांति, बस तू ही तू हैमेरा समर्पण, मेरा वजूद तू हैबस तू ही तू हैबस तू ही तू है
हे प्रभु तू ही किनारा
जगमोहन जोशी
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