अनंत की पुकार
कुंज बिहारी
Devotional
About
यह रचना एक अत्यंत शांत और ध्यानपूर्ण भजन है, जो हारमोनियम और तबले की मधुर संगत के साथ प्रस्तुत की गई है। इसमें गायक की आवाज़ को मुख्य केंद्र में रखते हुए राग-आधारित माधुर्य और पारंपरिक वाद्ययंत्रों का प्राकृतिक मिश्रण किया गया है।
Lyrics
अंधियारे मन में एक दीप जला देमेरे भीतर के शोर को तू मिटा देसांसों की माला में नाम तेरा पिरोयाखोया हूँ तुझमें, खुद को मैंने पाया
राहें धुंधली हैं, डगर है अनजानीतू ही है मांझी, तू ही जिंदगानीपलकों के नीचे जो सपना सजा हैवो तेरे चरणों की धूल सा खड़ा हैन कोई इच्छा, न कोई बंधन शेष हैतेरी कृपा का ही बस मुझे परिवेश है
सांसों में बसे, तू ही है मेरे अंतर में
तेरा ही प्रकाश है, हर एक मंजर में
मैं तो हूँ शून्य, तू ही है विस्तार मेरा
तू ही है अंत, तू ही है आधार मेरा
अहंकार का ये जो पर्वत खड़ा थावो आज तिनका सा बह कर बढ़ा थातेरी करुणा की धारा ने सब धो दियाअस्तित्व मेरा, तुझमें ही सो गयान मैं रहा बाकी, न तू मुझसे दूर हैतेरे मिलन का ही बस एक सुरूर है
उठ रही लहरें, सागर के प्यार कीगूंज रही धुन, इस अनंत संसार कीमिट गए फासले, हो गई एक रूहतेरी ज्योति से महकी है हर एक सूअनहद की नाद में, मैं खोता चला जाऊंतेरी ही शरण में, मैं होता चला जाऊं
हर कण में तू ही तू, बस तू ही तू है
मिट गया ये भ्रम, अब तो तू ही तू है
शांति का सागर, मेरे भीतर उतरा है
जीवन का अर्थ, तेरे नाम में निखरा है
अब कैसी प्यास, अब कैसा ये मोह हैतेरी उपस्थिति ही, सबसे बड़ा ओज हैसमर्पण की अग्नि में, सब जल गया हैजो था नश्वर, वो अब बदल गया हैखुले हैं द्वार, अब मुक्ति का सवेरा हैजो कुछ भी मेरा था, अब सब तेरा है
शांत है मन, स्थिर है ये चेतनातेरी ही छाया में, मेरी है वंदनाबस तू ही तू...बस तू ही तू...अमिट है ये प्रेम, अनंत है ये नातातू ही है ईश्वर, तू ही है विधाताबस तू ही तू...शांति... शांति... शांति...
अनंत की पुकार
कुंज बिहारी
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