तेरी ज्योति में समाया
श्याम शरण
भजन
About
यह भजन एक पारंपरिक हारमोनियम धुन और तबले के लयबद्ध चक्र के साथ शुरू होता है, जो धीरे-धीरे एक गहन आध्यात्मिक अनुभव में बदल जाता है। इसमें कॉल-एंड-रिस्पॉन्स गायन शैली का उपयोग किया गया है, जो श्रोताओं को भक्ति के गहरे भाव में ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
Lyrics
मन की वीणा के तार छेड़ देशून्य में मुझको तू मोड़ देसाँसों की माला में नाम तेराओ मेरे प्रभु, अब छोड़ दे
भटक रही थी ये रूह कब सेदुनिया के झूठे इन शोर मेंढूँढा तुझे जब भीतर अपनेपाया तुझे ही हर छोर मेंमिट गया अहंकार का ये पर्दानूर तेरा अब दिखे हर ओर में
तेरी शरण में आया हूँ मैंसब कुछ अपना लाया हूँ मैंमिटा दे द्वैत का ये बंधनतेरी ज्योति में समाया हूँ मैं
राधे गोविंद, राधे गोविंद
राधे गोविंद, राधे गोविंद
श्याम सुंदर, घनश्याम सुंदर
श्याम सुंदर, घनश्याम सुंदर
नदी की धारा जो सागर को ढूँढेमैं भी तो तुझको ही ढूँढता रहामाया की गलियों में खोकर मैं अक्सरखुद से ही मैं तो लड़ता रहाअब तो थाम ले हाथ मेरामैं तो बस तेरा ही बनता रहा
हृदय का आसन सजाया है मैंनेप्रेम का दीपक जलाया है मैंनेमिट गई दुविधा, मिट गई दूरीतेरा ही नाम अब गाया है मैंनेतेरा ही नाम अब गाया है मैंनेतेरा ही नाम अब गाया है मैंने
हरि बोल, हरि बोल, हरि बोल
हरि बोल, हरि बोल, हरि बोल
केशव माधव, केशव माधव
केशव माधव, केशव माधव
शांति का सागर, तू ही किनारातेरी ही छाया का है ये सहारामुझमें ही तू है, मैं तुझमें ही हूँमेरा तो तू ही है, बस तू ही प्याराबस तू ही प्यारा...बस तू ही प्यारा...
तेरी ज्योति में समाया
श्याम शरण
Preview