गोविंद की शरण
हरि विनोद शास्त्री
भजन
About
यह भजन हारमोनियम की मधुर धुन और तबले के पारंपरिक ताल चक्र के साथ एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। इसमें कॉल-एंड-रिस्पॉन्स गायन शैली का उपयोग किया गया है जो धीरे-धीरे तीव्रता बढ़ाते हुए मन को शांति और भक्ति से भर देता है।
Lyrics
मन की वीणा के तारों में, तेरा ही नाम गूँजता हैसाँसों की इस माला में, तू ही मोती पिरोता हैअंधियारे पथ पर मेरे, तू ही तो ज्योत जलाता हैबिन तेरे प्रभु, ये मन कहीं न चैन पाता है
भीड़ में खोया था मैं, खुद से ही अंजान थामाया के इन जाल में, फँसा हुआ इन्सान थातूने आकर हाथ थामा, राह मेरी दिखला दीसूखी इस काया में, अमृत की बूँद बरसा दीअब तो बस तेरा ही ध्यान, हर पल मेरे मन में हैतू ही मेरी मंज़िल है, तू ही मेरे कण-कण में है
हे गोविंद, हे गोपाल, तेरी महिमा अपरम्पारसागर जैसे गहरे तुम, तुम ही मेरा आधारहे गोविंद, हे गोपाल, तेरी महिमा अपरम्पारचरणों में तेरे ही प्रभु, मिलता है मुझे संसार
राम नाम सुखदाई
राम नाम सुखदाई
मन की शांति का आधार
मन की शांति का आधार
भजो रे भाई, भजो रे भाई
भजो रे भाई, भजो रे भाई
प्रेम से गाओ बारम्बार
प्रेम से गाओ बारम्बार
तेरा नाम, तेरा ध्यान, तेरा ही है गुणगानहृदय के सिंहासन पर, बसते तुम ही भगवानज़रा सा तू मुस्कुरा दे, तो खिल जाए ये जीवनतेरे प्रेम के रंग में, सराबोर हुआ मेरा तनधड़कन-धड़कन नाम तुम्हारा, रोम-रोम में नूर हैतुझसे मिलकर ही तो प्रभु, मेरा हर ग़म दूर है
हे गोविंद, हे गोपाल, तेरी महिमा अपरम्पारसागर जैसे गहरे तुम, तुम ही मेरा आधारहे गोविंद, हे गोपाल, तेरी महिमा अपरम्पारचरणों में तेरे ही प्रभु, मिलता है मुझे संसार
शांत हुआ ये मन मेरा, मिट गया सारा द्वंद्वमिल गया है अंत में मुझे, तेरा ही पावन वंदनबस तेरा ही नाम, बस तेरा ही नामअब और न कोई काम, बस तेरा ही नामशांति... शांति... शांति...
गोविंद की शरण
हरि विनोद शास्त्री
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