मन की इबादत
साधना स्वर
Indian Devotional
About
यह गीत एक शांत और ध्यानमग्न रचना है जिसमें हारमोनियम की मधुर धुन और तबले की लयबद्ध ताल का सुंदर मेल है। इसमें भक्तिपूर्ण गायन के माध्यम से ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और शांति का भाव व्यक्त किया गया है।
Lyrics
ओम् नमो, ओम् नमोमन की गलियों में, तेरी ही आहट हैशून्य में गूँजती, तेरी ही इबादत है
दीपक जलाया है मैंने, तेरी ही यादों काकतरा-कतरा बहता है, दरिया ये स्वादों कामिट्टी का ये काया, ओढ़ के बैठी हैतेरी ही रूहानी, प्यास ये ऐंठी हैपलकें झुका लूँ तो, दर्शन तेरा होअंधियारे मन में, अर्पण तेरा हो
तू ही किनारा, तू ही मझधार हैतुझमें ही उलझा, मेरा संसार हैमिट गए सब फासले, मिट गए सब नामतेरी शरण में ही, मिलता है आरामओ मेरे साजन, ओ मेरे मीततुझसे ही शुरू, तुझपे ही प्रीत
धड़कन की लय में, तेरा ही नाम हैसांसों की माला में, तेरा ही काम हैबिखरा था जो मैं, अब संभल गयातेरी एक दृष्टि से, मैं बदल गयान कोई शिकायत, न कोई मलाल हैतेरी ही चौखट, मेरा निहाल है
- तू ही प्रकाश है
- तू ही आकाश है
- तू ही विश्वास है
- तू ही एहसास है
सागर की लहरों में, जैसे हो पानीतू ही है मेरी, अधूरी कहानीन मैं हूँ अलग, न तू है जुदाएक ही नूर से, सारा जहाँ है सजामिटा दे ये परदा, दिखा दे वो राहजिसमें बस तेरी, हो पावन पनाह
तू ही किनारा, तू ही मझधार हैतुझमें ही उलझा, मेरा संसार हैमिट गए सब फासले, मिट गए सब नामतेरी शरण में ही, मिलता है आरामओ मेरे साजन, ओ मेरे मीततुझसे ही शुरू, तुझपे ही प्रीत
ओम् शांति, ओम् शांतितेरी ही गोद में, अब मेरी भ्रांतिमिट गई सारी, बस तू ही तू हैसबके भीतर, बस तू ही तू हैतू ही तू है...तू ही तू है...
मन की इबादत
साधना स्वर
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