Skip to content
♪
Duration3:53

मिट्टी की सोंधी महक

रामदीन और लोक धुन

भारतीय लोक संगीत

About

यह गीत ग्रामीण भारत की सादगी और माटी के प्रेम को समर्पित है। इसमें ढोलक की थाप, हारमोनियम की मधुर धुन और सारंगी के सूक्ष्म स्वरों का समावेश है, जो एक जीवंत और पारंपरिक लोक अनुभव प्रदान करता है।

Lyrics

intro

ओ रे मनवा, ओ रे सजनवामाटी की खुशबू से महके गगनवारीत पुरानी, यादें सुहानीबहती जाए समय की रवानी

verse

सूरज की पहली किरण जब खेत को चूमेपवन के झोंकों में सरसों के फूल ये झूमेबैल की घंटी का शोर, सुबह का वो नज़ारानदी किनारे बैठा है देखो, मेरा प्यारामिट्टी की सोंधी महक में जीवन सारा बीताहाथों में लेकर खुशियों का ये गीत मैं गाता

refrain

ओ मेरी माटी, ओ मेरे प्यारे गाँवतेरे आँचल में ही है मेरी सारी छाँवरिश्ते पुराने, नाता है गहरातेरी गलियों में ही मेरा सवेराओ मेरी माटी, ओ मेरे प्यारे गाँव

verse

सावन की फुहारों ने जब धरती को भिगोयाभीगे बदन और मन में एक सपना है बोयादादी की कहानियों में परियों का वो डेराचाँदनी रात में चमकता, तारों का वो घेराचूल्हे की आग में पकती है रोटियाँ सादीहँसते-गाते बीत रही है, अपनी ये आबादी

refrain

ओ मेरी माटी, ओ मेरे प्यारे गाँवतेरे आँचल में ही है मेरी सारी छाँवरिश्ते पुराने, नाता है गहरातेरी गलियों में ही मेरा सवेराओ मेरी माटी, ओ मेरे प्यारे गाँव

instrumental-break
verse

बदलते हैं मौसम, बदलती है ये ऋतुएँपर मन के कोने में बसी हैं वो स्मृतियाँपीपल की छाँव में पंचायत का वो डेराबुजुर्गों की बातों में ज्ञान का है बसेरामेहनत का पसीना जब ज़मीं पर गिरता हैसोना बनकर वो फसल का रूप धरता है

refrain

ओ मेरी माटी, ओ मेरे प्यारे गाँवतेरे आँचल में ही है मेरी सारी छाँवरिश्ते पुराने, नाता है गहरातेरी गलियों में ही मेरा सवेराओ मेरी माटी, ओ मेरे प्यारे गाँव

outro

सदा रहे तेरा ये मान, ओ मेरे गाँवसदा रहे तेरा ये मान, ओ मेरे गाँवमाटी की पुकार है, माटी का ये प्यार हैमाटी की पुकार है, माटी का ये प्यार हैओ मेरे गाँव...ओ मेरे गाँव...

मिट्टी की सोंधी महक

रामदीन और लोक धुन

Preview