Skip to content
♪
Duration4:57

शून्य का विस्तार

आकाश और तरंग

इंडियन इलेक्ट्रॉनिक

About

यह ट्रैक पारंपरिक राग-आधारित माधुर्य और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक साउंडस्केप का एक परिष्कृत मिश्रण है। इसमें तबला की जटिल पॉलीरिदम और सिंथेसाइज़र की वायुमंडलीय परतों का उपयोग किया गया है, जो एक ध्यानपूर्ण और गहरा अनुभव प्रदान करता है।

Lyrics

intro

साँसों की ये धुंधली लकीरेंखोई हुई सी मेरी तकदीरेंआसमां के इस पार कहींढूंढता हूँ मैं खुद को ही यहीं

raga-alap

मदहोश सी ये शाम ढलेरूह के धागे आपस में मिलेंअम्बर की गहराई में सिमट जाऊंमैं अपनी ही परछाईं में लिपट जाऊं

build-up

धड़कन की ये कैसी रफ़्तार हैबदलता हुआ सा ये संसार हैमिट्टी की खुशबू, हवाओं का शोरदिल ले चला मुझे किस ओरमिट्टी की खुशबू, हवाओं का शोरदिल ले चला मुझे किस ओर

drop

जाग उठी है ये रूह मेरीखुल गई है बंदिशें ये तेरीसुन ले ज़रा, ये प्यास कैसी हैये खामोश सा अहसास कैसी हैसुन ले ज़रा, ये प्यास कैसी हैये खामोश सा अहसास कैसी है

breakdown

न कोई सीमा, न कोई बंधनपिघला सा है अब ये मेरा मनतारों के बीच जो राज़ छिपा हैवो मेरे ही अंदर कहीं दबा हैवो मेरे ही अंदर कहीं दबा है

outro

बिखर गया सब, सिमट गया मैंखुद में ही अब तो मिट गया मैंशून्य सा ये विस्तार हैबस एक अंतहीन प्यार हैबस एक अंतहीन प्यार है

शून्य का विस्तार

आकाश और तरंग

Preview