शून्य का विस्तार
आकाश और तरंग
इंडियन इलेक्ट्रॉनिक
About
यह ट्रैक पारंपरिक राग-आधारित माधुर्य और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक साउंडस्केप का एक परिष्कृत मिश्रण है। इसमें तबला की जटिल पॉलीरिदम और सिंथेसाइज़र की वायुमंडलीय परतों का उपयोग किया गया है, जो एक ध्यानपूर्ण और गहरा अनुभव प्रदान करता है।
Lyrics
साँसों की ये धुंधली लकीरेंखोई हुई सी मेरी तकदीरेंआसमां के इस पार कहींढूंढता हूँ मैं खुद को ही यहीं
मदहोश सी ये शाम ढलेरूह के धागे आपस में मिलेंअम्बर की गहराई में सिमट जाऊंमैं अपनी ही परछाईं में लिपट जाऊं
धड़कन की ये कैसी रफ़्तार हैबदलता हुआ सा ये संसार हैमिट्टी की खुशबू, हवाओं का शोरदिल ले चला मुझे किस ओरमिट्टी की खुशबू, हवाओं का शोरदिल ले चला मुझे किस ओर
जाग उठी है ये रूह मेरीखुल गई है बंदिशें ये तेरीसुन ले ज़रा, ये प्यास कैसी हैये खामोश सा अहसास कैसी हैसुन ले ज़रा, ये प्यास कैसी हैये खामोश सा अहसास कैसी है
न कोई सीमा, न कोई बंधनपिघला सा है अब ये मेरा मनतारों के बीच जो राज़ छिपा हैवो मेरे ही अंदर कहीं दबा हैवो मेरे ही अंदर कहीं दबा है
बिखर गया सब, सिमट गया मैंखुद में ही अब तो मिट गया मैंशून्य सा ये विस्तार हैबस एक अंतहीन प्यार हैबस एक अंतहीन प्यार है
शून्य का विस्तार
आकाश और तरंग
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