ओ मेरे साजन
विहान चैतन्य
Devotional
About
यह रचना राग-आधारित माधुर्य और पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे हारमोनियम और तबले के सूक्ष्म संतुलन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें गायन की प्रधानता है, जो ध्यान और शांति की अनुभूति कराने के लिए एक शांत और आध्यात्मिक वातावरण तैयार करती है।
Lyrics
मन की गलियों में सन्नाटा पसरा हैदीपक की लौ में कोई चेहरा निखरा हैशून्य की ओर बढ़ते कदम मेरेतेरी ही यादों का अब पहरा है
भीड़ में खोया था मैं खुद को ढूँढनेराहें मिलीं जब तुझे पुकारनेपत्थर की मूरत नहीं, तू तो एहसास हैसाँसों की डोरी में तेरा ही विश्वास हैमिटती गई मैं, तू ही बस्ता गयाबिन कहे लबों पे तेरा नाम हँसता गया
- ओ मेरे साजन
- तुझमें ही उलझा
- तेरी ही छाया
- खुद को हूँ पाया
- मिट जाए दूरी
- हो जाए पूरी
अहंकार की दीवारें ढहने लगी हैंख्वाहिशें अब तो चुप रहने लगी हैंन कोई मंजिल, न कोई ठिकानातेरी ही लहरों में मुझे है बह जानाजो था मेरा, वो अब तेरा हुआज़िंदगी का हर पन्ना सुनहरा हुआ
अनंत की ऊँचाइयों को मैं छू लूँतेरी रज़ा में ही अपना वजूद भूलूँज्वाला सी जगी है इस अंतर्मन मेंतू ही समाया है मेरे कण-कण मेंसागर की प्यास जैसे बूँद में मिलेमेरे हर ज़ख्म अब फूल बनकर खिलें
- तू ही सत्य है
- तू ही नित्य है
- तेरी ही माया
- सब कुछ तू लाया
- मौन में गूँजे
- तुझमें ही पूजे
दिन ढल गया है, अब रात भी नहींतेरी उपस्थिति के सिवा कोई बात भी नहींहृदय के द्वार पर दस्तक तेरी हैये रूह अब मुकम्मल, बस तेरी हैन माँगूँ सुख, न माँगूँ कोई वरदानतू मिल गया तो मिल गया पूरा जहान
उठती लहरों में तेरा ही नाम हैथकी हुई रूह को अब आराम हैपरम प्रकाश में मैं विलीन हो जाऊँतेरी ही धुन में मैं खो जाऊँसब छूट गया, बस तू ही बचाअंधेरे रास्तों में तू ही है सच्चा
शांति का सागर...अनंत का डेरा...अब न कोई मैं...सिर्फ तू... सिर्फ तू...सब शून्य है...सब सत्य है...बस तू... बस तू...
ओ मेरे साजन
विहान चैतन्य
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