सांवरिया की ज्योति
राही ज्योति
भजन
About
यह भजन राग-आधारित धुन और पारंपरिक तालवाद्य यंत्रों जैसे तबला और हारमोनियम का एक सुंदर मिश्रण है। इसमें एक गहन ध्यानपूर्ण अनुभव प्रदान करने के लिए स्वर-प्रधान रचना और भावपूर्ण गायन शैली का उपयोग किया गया है।
Lyrics
मेरे मन के सूने आंगन में,तेरी ज्योति का उजियारा है।सांसों की डोरी थामे हुए,बस तेरा ही तो सहारा है।
धूल भरी इस राहों में,मैं खोया सा एक राही हूँ।तेरी मर्जी के सागर में,बहती हुई एक स्याही हूँ।न कोई अपना, न कोई पराया,सबमें तेरा ही नूर समाया।मैं तो बस एक माटी का ढेला,तूने ही मुझको रूप बनाया।
- ओ मेरे सांवरिया
- तेरी ही माया
- मुझको जगा दे
- दर्शन करा दे
अहंकार की ये दीवारें,पल भर में ढह जाती हैं।जब तेरी करुणा की लहरें,मन को आके छू जाती हैं।न मांगू सोना, न मांगू चांदी,बस तेरी भक्ति की माला।पी लूँ मैं अमृत का प्याला,मिट जाए जीवन का ताला।
उठ रही है लहर दिल में,नाम तेरा ही पुकारती है।हर धड़कन अब मग्न होकर,तेरी ही राह निहारती है।तेज बढ़ा है, नूर बढ़ा है,भक्ति का ये रंग चढ़ा है।मिट गया मैं, बच गया तू,तेरा ही तो सब ये पड़ा है।
- तू ही सत्य है
- तू ही आधार है
- तेरी शरण में
- सब स्वीकार है
शांत हुआ अब कोलाहल सब,भीतर का ये शोर मिटा।सत्य का सूरज उदय हुआ है,अंधियारा मन का कट गया।अब न कोई बंधन भारी,मुक्ति की ये कैसी बारी।तेरी कृपा का हाथ जो आया,सफल हुई मेरी दुनिया सारी।
अनंत की ओर ये मन चला है,छोड़ के अपना सारा भार।सागर में जैसे बूंद समाई,हो गया भव से पार।तेरा ही अस्तित्व है मुझमें,तेरा ही विस्तार है।तू ही आदि, तू ही अंत,तू ही परमानंद का द्वार है।
शांत मन, निश्छल भाव,तेरी ही महिमा का प्रभाव।बस तू, बस तू, बस तू ही तू,मेरे भीतर का पावन उजास।शांति, शांति, अनंत शांति।
सांवरिया की ज्योति
राही ज्योति
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