नदिया के तीर बसेरा
आर्यन वनवासी
भारतीय लोक संगीत
About
यह गीत पारंपरिक भारतीय लोक शैलियों का एक सुंदर मिश्रण है, जिसमें ढोलक की लयबद्ध ताल और सारंगी की मर्मस्पर्शी धुनें शामिल हैं। इसमें एक मधुर मोडल मेलोडी और लयबद्ध गायन शैली का उपयोग किया गया है जो ग्रामीण भारत की सोंधी मिट्टी और सावन की यादों को जीवंत करती है।
Lyrics
ओ सांवरे, ओ मनमीतमिट्टी की सोंधी खुशबू मेंबसे हैं तेरे गीतओ मेरे मीत
खेतों की मेढ़ों पर बैठ केसूरज को ढलते देखा हैतेरी यादों के काजल सेमैंने अपना माथा रेखा हैपगडंडी की धूल उड़ी हैजैसे कोई सपना टूटा होपीपल की ठंडी छाया मेंजैसे कोई रिश्ता छूटा हो
ओ नदिया के तीर बसेरामन में तेरा ही फेरासावन की पहली बूंदों मेंढूंढूं मैं मुखड़ा तेराओ नदिया के तीर बसेरामन में तेरा ही फेरा
चांदी जैसी रात खिली हैतारों ने भी आंखें मूंदींतेरी पायल की छन-छन नेमेरी धड़कनें खूब हैं गूंदींगुलमोहर की लाल पंखुड़ीजैसे कोई खत लिखती होतेरी बातों की मीठी मिश्रीमेरे मन में घुलती रहती हो
ओ नदिया के तीर बसेरामन में तेरा ही फेरासावन की पहली बूंदों मेंढूंढूं मैं मुखड़ा तेराओ नदिया के तीर बसेरामन में तेरा ही फेरा
चुन्नी के कोने में मैंनेतेरे नाम की गांठ लगाई हैमटकी फोड़ के मक्खन जैसेतूने मेरी नींद चुराई हैगांव की उस चौपाल पे अब भीतेरी आहट का पहरा हैतू ही मेरी इबादत हैतू ही मेरा किनारा है
ओ नदिया के तीर बसेरामन में तेरा ही फेरासावन की पहली बूंदों मेंढूंढूं मैं मुखड़ा तेराओ नदिया के तीर बसेरामन में तेरा ही फेरा
सावन की पहली बूंदेंतेरी यादें, तेरी धुनेंमिट्टी में बस गए हमसांवरे, ओ मेरे मनमीतबस गए हम...बस गए हम...
नदिया के तीर बसेरा
आर्यन वनवासी
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