मिट्टी की गूँज
ज़मीर
इंडियन हिप हॉप
About
यह ट्रैक भारी 808 सब-बास और पारंपरिक सितार के नमूनों का एक शक्तिशाली मिश्रण है। इसमें सामाजिक-राजनीतिक संघर्षों को दर्शाते हुए आक्रामक फ्लो और गहरी लयबद्धता का उपयोग किया गया है।
Lyrics
गली की धूल में दबे हैं ख्वाब कितनेखामोश लबों के पीछे शोर है कितनेसपनों के शहर में अपना ठिकाना ढूँढतेखुद को मिटाकर खुद को ही हम माँगते
सीमेंट की इन दीवारों के पीछे का सचभूख के साये में पिसता है यहाँ का बचजेब में फटे नोट, पर आँखों में है आगकिस्मत की लकीरों से लड़ना है अब आजवो ऊँची इमारतें, ये झुग्गी की बस्तियाँअमीर की दावतें, यहाँ खाली हैं तस्तियाँहक की लड़ाई में हम सब एक साथ हैंमंजिल की धुन में, अपने ही हाथ हैं
दीवारें गिरा के, रास्ता हम बनाएंगेहारे नहीं हैं अभी, फिर से हम आएंगेलहू में उबाल है, सीने में है ईमानमिट्टी से जुड़े हैं, यही अपनी पहचान
उठो अब जागो, ये वक्त है बदलने कातूफ़ान बन के, हर डर को कुचलने काअपनी ज़ुबान, अपना लहजा, अपनी है शानरग-रग में दौड़ती है ये अपनी आनउठो अब जागो, ये वक्त है बदलने कातूफ़ान बन के, हर डर को कुचलने का
किताबों के पन्नों से बाहर है ये दुनियासड़कों पे बिखरी पड़ी है यहाँ की चुनौतियाँकिसी को विरासत, किसी को बस संघर्ष मिलाहमने तो काँटों पे चल के, अपना रास्ता चुनाये शहर हमारा है, इसकी रगों में हम हैंकल की फिक्र नहीं, आज के हम ही दम हैंनकाब ओढ़ के जो बैठे हैं कुर्सी पे यहाँउनको भी पता है, कि क्या है ये धुआँ
ना झुकेंगे, ना रुकेंगे, ना कभी हम डरेंगेहक की इस जंग में, हम आगे ही बढ़ेंगेमिट्टी की खुशबू में, बसी है अपनी रूहसूरज की तपिश में, हम ढलेंगे बे-खौफ
उठो अब जागो, ये वक्त है बदलने कातूफ़ान बन के, हर डर को कुचलने काअपनी ज़ुबान, अपना लहजा, अपनी है शानरग-रग में दौड़ती है ये अपनी आनउठो अब जागो, ये वक्त है बदलने कातूफ़ान बन के, हर डर को कुचलने का
कल बदलेगा, मंज़र भी बदलेगाये कारवां अब न रुकने वाला हैलिखेंगे हम अपनी तक़दीर खुदये संघर्ष ही तो अपना उजाला हैअपना उजाला है...खुद ही तो उजाला है...
मिट्टी की गूँज
ज़मीर
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