मिट्टी की खुशबू
आलोक और लोक-राग समूह
भारतीय लोक संगीत
About
यह गीत पारंपरिक भारतीय लोक संगीत की जड़ों से जुड़ा है, जिसमें ढोलक की थाप और हारमोनियम की मधुर धुन का अद्भुत मेल है। इसमें लयबद्ध गायन और ग्रामीण जीवन की सादगी को दर्शाते हुए एक मधुर और भावपूर्ण अनुभव प्रदान किया गया है।
Lyrics
ओ रे मनवा, सुन ले पुकारमाटी की खुशबू, रूत है बहारखेतों में झूमती सुनहरी बालियाँनदी के किनारे, खुशियों की डालियाँ
सावन की बूँदें जब धरती को छूती हैंसूखी हुई क्यारियाँ फिर से खिलती हैंदादी की कहानियाँ, वो नानी की लोरीयादें पुरानी जैसे चूनर की कोरीबैलों की घंटी, वो पगडंडी की राहघर लौटते हुए, दिल में है चाह
ओ सजनी, देखो मौसम सुहानागाँव की गलियों में फिर है आनामिट्टी से रिश्ता, ये नाता है पुरानासपनों के आँगन में दीप जलानाओ सजनी, देखो मौसम सुहाना
मेहनत की पसीने से सोना उगायासूरज की तपिश में घर को सजायाहाथों में हाथ ले, गीत गाते हैं सबमिलजुल के खुशियाँ मनाते हैं सबत्यौहारों की रौनक, वो दीयों की थालीभर दे खुशियों से ये दुनिया निराली
ओ सजनी, देखो मौसम सुहानागाँव की गलियों में फिर है आनामिट्टी से रिश्ता, ये नाता है पुरानासपनों के आँगन में दीप जलानाओ सजनी, देखो मौसम सुहाना
पीपल की छाँव में ठंडी हवाएँबचपन की बातें वो याद दिलाएँबुजुर्गों की बातें, वो अनुभव का सारजीना सिखाया हमें, प्यार ही प्यारपरदेस की राहें, पर दिल है यहींअपनी माटी से बढ़कर तो कुछ भी नहीं
ओ सजनी, देखो मौसम सुहानागाँव की गलियों में फिर है आनामिट्टी से रिश्ता, ये नाता है पुरानासपनों के आँगन में दीप जलानाओ सजनी, देखो मौसम सुहाना
दीप जलते रहें, राहें महकती रहेंखुशियों की बातें, सदा चहकती रहेंमाटी को नमन, अपनों को प्यारआया है खुशियों का ये त्यौहारआया है खुशियों का ये त्यौहार...
मिट्टी की खुशबू
आलोक और लोक-राग समूह
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